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मानसून फिर अटका,प्रदेश के 27 में से 15 जिलों में 59 फीसदी तक कम बारिश

रायपुर . छत्तीसगढ़ में हफ्तेभर पहले तक ठीक-ठाक बरसने के बाद मानसूनी हवा फिर रुक गई है। पिछले छह दिन से प्रदेश के अधिकांश हिस्से में बारिश या तो थमी हुई है, या बहुत हल्की है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यहां बारिश की हवाएं 17 जुलाई तक चलने के अासार कम हैं। वजह ये है कि बंगाल की खाड़ी में कोई सिस्टम नहीं है। यह एक-दो दिन में बनना शुरू हुअा तो मैच्योर होने में चार-पांच दिन लगेंगे। यही नहीं, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम भी नहीं हैं, जो समुद्र से बादलों को उस तरफ खींच लें। इस कारण से चार-पांच सूखे रहने वाले हैं। इसका असर ये हुअा है कि प्रदेश के 12 जिलों में जहां औसत से ज्यादा बारिश हुई थी, वहां के अांकड़े सामान्य हो चुके हैं। बचे हुए 15 जिलों में तो बारिश औसत से 59 फीसदी तक कम हो गई है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार खाड़ी और उत्तर भारत में सिस्टम बनने पर मानसूनी हवा छत्तीसगढ़ के ऊपर से बरसती हुई नार्थ इंडिया की तरफ बढ़ती है। जब खाड़ी में सिस्टम बनता है तो वह हवा को तटवर्ती इलाकों तक भेजता है। ठीक इसी समय उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ बनने पर वह समुद्री हवा को अपनी ओर खींचती है। अभी एेसा कोई सिस्टम ही डेवलप नहीं हुअा है। एक द्रोणिका है, जो काफी कमजोर है। सिर्फ इसी के असर से थोड़ी नमी अा रही है। इससे छुटपुट बारिश हो रही है।

12 जिलों में सामान्य, 12 में कम बारिश : राज्य के 27 में से 12 जिलों में सामान्य बारिश हो चुकी है। नार्मल से 19 फीसदी तक कम या अधिक को सामान्य माना जाता है। दूसरी तरफ इतने ही जिले यानी 12 जिलों में 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश हुई है। सिर्फ तीन जिले बीजापुर, कोंडागांव व धमतरी में ही एक्सेस बारिश हुई है। मौसम विभाग के रिकार्ड के मुताबिक 1 जून से अब 13 जुलाई तक राज्यभर में 306.6 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इस दौरान नार्मल बारिश 343.9 मिमी है।

यहां हुई नार्मल बारिश : प्रदेश के 12 जिलों में नार्मल बारिश हुई है। मौसम विभाग में सामान्य से 19 फीसदी तक कम या अधिक बारिश को नार्मल माना जाता है। 12 जिलों में बलरामपुर, बस्तर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, जांजगीर, कांकेर, कोरिया, महासमुंद, नारायणपुर, सुकमा सूरजपुर शामिल है।

यहां एक्सेस
बीजापुर – 436.6 मिमी – 21 प्रतिशत अधिक
धमतरी – 395.7 मिमी –  27 प्रतिशत अधिक
कोंडागांव – 538.7 मिमी – 57 प्रतिशत अधिक
यहां हुई कम
सरगुजा – 198.9 मिमी – 51 प्रतिशत कम
रायपुर – 203.1 मिमी – 36 प्रतिशत कम
राजनांदगांव – 188.4 मिमी – 36 प्रतिशत कम

लेकिन मानसून ब्रेक नहीं : लालपुर मौसम केंद्र के पूर्व मौसम विज्ञानी पीएल देवांगन के अनुसार इसे मानसून ब्रेक नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि मानसून ब्रेक की स्थिति तब बनती है, जब 15 से 20 दिन तक प्रदेशभर में बारिश न हो, या इतनी कम हो कि बारिश औसत से बहुत नीचे चली जाए। अभी राज्य में औसत से सिर्फ 11 फीसदी कम बारिश हुई है।

जल सकते हैं धान के बीज : मानसून आने के बाद खरीफ की फसल के लिए ज्यादातर किसानों ने बुआई शुरू कर दी है। अब खेतों को पानी की जरूरत है। पानी नहीं मिलने से खेतों में डाले गए बीज जल सकते हैं, जहां पौधे निकल चुके हैं वह भी पानी नहीं मिलने से खराब हो सकते हैं। कृषि मौसम विज्ञानियों का कहना है कि देर से बुआई करने वालों को अभी ज्यादा नुकसान नहीं है।

द्रोणिका से थोड़ी उम्मीद : मौसम विज्ञानियों के अनुसार हिमालय की तराई में एक द्रोणिका है। इसका दूसरा हिस्सा उत्तर-पश्चिम बिहार से उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल तक सक्रिय है। इसके असर से राज्य में कहीं-कहीं पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

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