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महाभारत के युद्ध में दुर्योधन ने कर दी थी यह बड़ी गलती, इसी वजह से हार गई कौरवों की सेना

महाभारत के युद्ध में पांडवों ने कौरवों को पराजित कर दिया था, यह तो सभी जानते हैं मगर शायद यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि इसके लिए काफी हद तक दुर्योधन की एक बेवकूफी जिम्मेदार थी। दुर्योधन ने अगर यह गलती न की होती को शायद महाभारत के युद्ध का नतीजा कुछ और होता।

प्राचीन ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि जब यह तय हो गया कि कौरव और पांडवों के बीच युद्ध होगा, तब अर्जुन और दुर्योधन दोनों भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगने द्वारिका गए। पहले दुर्योधन श्रीकृष्ण के पास पहुंचा और उसके बाद अर्जुन। उस समय श्रीकृष्ण सो रहे थे। इसीलिए दोनों उनके जागने की प्रतिक्षा करने लगे।

श्रीकृष्ण जगे तो उन्होंने सबसे पहले अर्जुन को देखा। इसका कारण यह था कि अर्जुन श्रीकृष्ण के पैरों के पास बैठे हुए थे। दुर्योधन पर श्रीकृष्ण की नजर नहीं पड़ी क्योंकि वह सिर के पास खड़ा था।

श्रीकृष्ण के जगते ही अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि वासुदेव मैं आपसे युद्ध में मदद मांगने आया हूं। तभी दुर्योधन ने भी कहा कि श्रीकृष्ण, मैं भी आया हूं और मैं अर्जुन से पहले यहां आपसे मदद मांगने आया हूं। इसीलिए पहले आपको मेरी मदद करनी होगी।

श्रीकृष्ण ने अर्जुन व दुर्योधन दोनों की ओर देखा और फिर कहा कि पहले मैंने अर्जुन को देखा, लेकिन तुम यहां पहले आए हो। अब मुझे दोनों की ही मदद करनी होगी। अब मेरे पास तुम दोनों के लिए दो विकल्प हैं। एक तरफ मैं रहूंगा और दूसरी तरफ मेरी पूरी नारायणी सेना। तुम दोनों तय कर लो, किसे क्या चाहिए। लेकिन यह भी ध्यान रखना कि मैं युद्ध में शस्त्र नहीं उठाऊंगा।

अर्जुन बहुत दूरदर्शी था। इतना सुनते ही अर्जुन ने कहा कि मुझे तो आपका साथ चाहिए। यह सुनते ही दुर्योधन प्रसन्न हो गया। उसे नारायणी सेना चाहिए थी क्योंकि श्रीकृष्ण पहले ही कर चुके थे कि मैं शस्त्र नहीं उठाऊंगा। उस समय नारायणी सेना सबसे घातक सेना मानी जाती थी। श्रीकृष्ण ने दोनों की इच्छा अनुसार मदद करने के लिए सहमति दे दी।

इस प्रसंग में दुर्योधन ने सबसे बड़ी गलती कर दी। उसने श्रीकृष्ण को छोडक़र नारायणी सेना मांग ली। जबकि अर्जुन ने श्रीकृष्ण को मांगा। अर्जुन समझदार था। वह यह जानता था कि जहां भगवान होंगे जीत वहीं होगी। जबकि दुर्योधन श्रीकृष्ण की बात का रहस्य नहीं सका। युद्ध में समय-समय पर श्रीकृष्ण ने पांडवों की रक्षा की। दुर्योधन की इसी गलती की वजह से कौरवों की हार हुई।

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