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मसूद को वैश्विक आतंकी मामला: चीन को मनाने में जुटे US, फ्रांस, इंग्लैंड

वॉशिंगटन:आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में शामिल करने के प्रयास अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए चौतरफा दबाव बनाए हुए हैं। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मसूद के पक्ष में चीन के वीटो के बाद अब खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। जहां भारत ने चीन द्वारा इस प्रस्ताव पर वीटो लगाने पर निराशा जताई है, वहीं अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब भी इस मामले पर चीन के साथ चर्चा कर रहे हैं। यदि तीनों देशों के इस प्रयास के बावजूद भी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो तीनों देश यूएन की सबसे शक्तिशाली शाखा (यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली) में इस मुद्दे पर खुली बहस के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहे हैं। तीनों देश इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए पिछले 50 घंटे से चीन के साथ ‘सकारात्मक’ चर्चा कर रहे हैं।

भारत के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध कमिटी के साथ मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर अब भी काम कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि भारत इस मामले में जितना संभव होगा, उतना संयम बरतेगा। हम सावधान और आशावान हैं कि मसूद को प्रतिबंधित किया जाएगा। चीन को पाकिस्तान के साथ कई मुद्दों को सुलझाना है। हमारे पास 14 सदस्यों का समर्थन है। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब चीन के साथ गहन ‘सकारात्मक’ चर्चा कर रहे हैं, ताकि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति में वैश्विक आतंकवादी घोषित करने को लेकर कोई ‘समझौता’ किया जा सके। इस मामले के जानकार लोगों के अनुसार अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव की भाषा को लेकर भी चीन से बातचीत कर रहे हैं।

चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति में पेश प्रस्ताव को बुधवार को अपने वीटो के अधिकार के माध्यम से चौथी बार बाधित कर दिया था। इस प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने ही पेश किया था। इन तीनों देशों ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश-ए-मोहम्मद के हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के कुछ दिनों बाद प्रस्ताव पेश किया था। इस हमले में सीआरपीएस के 44 जवान शहीद हो गए थे।

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