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भारत के इन 4 मंदिरों का रहस्य है सबसे अलग, आखिर क्यों बने हुए है ये सभी मंदिर एक राज!

भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थान, गुफाएं आपको यकीनन मिल जाएंगे, जिनका रहस्य या तो मिला नहीं और जो मिले उनको जानकर हर कोई हैरान है। आज हम आपको ऐसे ही रहस्य से भरे मंदिर के बारे में बताएंगे, जिनका रहस्य वैज्ञानिक प्रगति के बाद आज भी एक रहस्य, एक राज है।

1. करणी माता मंदिर, राजस्थान

इस मंदिर को चूहों वाली माता का मंदिर से पुकारा जाता है, ये राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देशनोक शहर में स्थित है। करणी माता इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनकी छत्रछाया में चूहों का साम्राज्य स्थापित है। मान्यता है कि जिसे सफेद चूहा दिख जाता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसकी मान्यता है कि लोग इधर पांव उठाकर नहीं चल सकते, उन्हें पांव घिसट-घिसटकर चलना पड़ता है, लेकिन मंदिर के बाहर ये कभी नजर ही नहीं आते।

2. ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

ज्वाला देवी का प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कालीधार पहाड़ी के मध्य स्थित है। यह भी भारत का एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। इसकी मान्यता है कि इस स्थान पर पर माता सती की जीभ गिरी थी। माता सती की जीभ के प्रतीक के रुप में यहां धरती के गर्भ से लपलपाती ज्वालाएं निकलती हैं, जो नौ रंग की होती हैं। इन नौ रंगों की ज्वालाओं को देवी शक्ति का नौ रुप माना जाता है। ये देवियां है: महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विन्ध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी। हालांकि किसी को यह मालूम नहीं कि ये ज्वालाएं कहां से प्रकट हो रही हैं? और यह कब तक जलती रहेगी?

 

3. काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के शहर उज्जैन लगभग 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित है भगवान काल भैरव का एक प्राचीन मंदिर भी अपने रहस्य के लिए चर्चित में रहता है। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु उन्हें प्रसाद के तौर पर केवल शराब ही चढ़ाते हैं। आश्चर्यजनक यह है कि जब शराब का प्याला काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाया जाता है, तो वह एक पल में खाली हो जाता है। अब ये कैसे हो रहा है इसका रहस्य भी किसी को नहीं मालूम।

 

4. कामाख्या मंदिर, असम

पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में गुवाहाटी के पास स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में देवी सती या मां दुर्गा की एक भी मूर्ति नहीं है। कहते हैं यहां हर किसी कामना सिद्ध होती है। यही कारण इस मंदिर को कामाख्या कहा जाता है।

 

कहते हैं कि महीने में एकबार इस पत्थर से खून की धारा निकलती है. ऐसा क्यों और कैसे होता है, यह आजतक किसी को ज्ञात नहीं है?

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