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बडी पार्टी में अच्छे कार्यकर्ताओं का अकाल, अभिनेता बहाल…

भाजपा दुनिया की सब से बडी राजनितिक पार्टी है। करीब 10 करोड से ज्यादा उसके पास कार्यकर्ताओं की फौज है। 17वीं लोकसभा चुनाव में फिर एक बार सत्ता पाने के लिये भाजपा मैदान में है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद चुनावी मैदान में उतरे है। टिक्टों के बंटवारो के लेकर देखा जाय तो युपीमें भाजपाने कम से कम हो अभिनेताओं को इसबार टिक्ट दिया है। सपा के अखिलेश यादव के सामे निरूहुआ को टिक्ट दिया तो गोरखपुर सीट के लिये भोजपुरी फिल्मों के कलाकार रवि किशन को टिक्ट मिला। युपी में ही भाजपा ने मथुरा से फिर से फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को मैदान में उतारा तो सपा से आई अन्य फिल्म नेत्री जयाप्रदा को पार्टी में लेते ही रामपुर से टिक्ट भी थमा दिया। युपीमे भाजपा के सूचि में कम से कम 4 फिल्म कलाकार को टिक्ट मिला है या देना पडा है। दुसरे राज्यों का बात करे तो गुजरात में पिछलीबार कलाकार परेश रावल को टिक्ट दी गइ थी। इस बार उन्होंने ही कह दिया की बस, और नहीं अब और नहीं…! बाबुभैयाने फिर से लडना क्यों पसंद नहीं किया ये तो बे ही जाने तेकिन सब से बडी पार्टी को कार्यकर्ता की बजाय अभिनेता पर जीत का ज्यादा विश्वास क्यों आता है ये एक चिंतनीय विषय हो सकता है।

यदि युपी की बात करें तो भाजपा के साथ लाखो कार्यकर्ता जुडे है। कइ तो बरसों पार्टी के साथ है। भाजपा में रह कर कइ कार्यकरता समाजसेवा का काम भी करते है और कर रहै है। कइ कार्यकर्ता टिक्ट की आश में भी पार्टी का काम दौडे दौडे करते है। लेकीन जब चुनाव आता है तो जैसे उस कमान्डो को एक और खडा रहने के लिये कहा वैसे ही पार्टी के लिये काम करनेवाले कार्यकर्ताओं से कह देते है एक ओर खडे रहीये निरूहुआ आ रहे है…रविकिशन आ रहे है…जयाप्रदा आ रही है..हेमाजी को फिर से जीताना है….! जिन्होंने कभा पार्टी का झंडा नहीं उठाया उसे फटाफट पार्टी में एन्ट्री मिलती है और सटासट टिक्ट भा मिल जाती है…!ऐसा क्यों..? क्या इतनी बडा पार्टी के पास चुनाव में जीत सके ऐसे कार्यकर्ताओ का अकाल है क्या..? क्यों अभिनेताओ को बहाल किये जा रहै है.? पार्टी में कइ कार्यकर्ता जमीन से जुडे है, समाज की सेवा करते है और पार्टी को आगे बढाते है। उन्हें क्यों टिक्ट नहीं मिलती..?

दुनिया की सब से बडी पार्टी को एक दो सीट के लिये अभिनेता पर आधार रखना पडे ये अजीब नहीं लगता क्या..? क्या मथुरा में भाजपा के पास एक भी ऐसा निष्ठावान कार्यकर्ता नहीं जो टिक्ट के काबिल हो..? क्या एक ही सीट से 10-10 साल तक एक ही प्रतियाशी जैसे की हेमामालिनी ही राज करेंगी..? मथुरा या रामपुर या गोरखपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के लिये जो दिन रात काम करते है, पसीनी बहाते है, नेता के लिये विनम्रता से टेबल कुरशी लगाते है उन्हें टिक्ट क्यों नहीं..? रविकिशन पीछलीबार कांग्रेस से चुनाव लडे। हार गये। 5 साल के बाद भाजपा में आये और फुर्र से टिक्ट ले गये। टिकिट कीसे देना ये पार्टी का अंदरूनी मामला हो सकता है लेकिन जो सब को दिख रहा है वह यब है की सब से बडी पार्टी में कार्यकर्ताओं का अकाल है जो अभिनेता का दामन पकड कर पार्टी कहती है-प्लीझ,हमारे यहां आइये, टिक्ट पाइये हमारा कार्यकर्ता तो बुथ के लिये ही है,,,भारत माता की जय…!

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