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प्रेम, विश्वास और समर्पण के साथ करे दिन की शुरुआत

ज़िन्दगी का सफर इतना सुहाना होना चाहिये, सितम हो फिर भी दिल शायराना होना चाहिये।

कश्तिया उन्ही की डूबती है, जिनके ईमान डगमगाते हैं, जिनके दिल में नेकी होती है, उनके आगे मंजिले भी सर झुकाती है।

भाग्य और झूठ के साथ जितनी ज्यादा उम्मीद करोगे वो उतना ही ज्यादा निराश करेगा, कर्म और सच पर जितना जोर दोगे, वो उम्मीद से सदैव ही ज्यादा ही देगा।

 

कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है दूसरों को नसीहत देना तथा आलोचना करना सबसे आसान काम है, सबसे मुश्किल काम है चुप रहना और आलोचना सुनना, यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए।

मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है, “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ यह अहंकार है, इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध बढ़ता है और इच्छा पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है, इसलिये जीवन की हर स्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठता है।

 

उम्मीदें तैरती रहती हैं,कश्तीयां डूब जाती है, कुछ घर सलामत रहते हैं, आँधियाँ जब भी आती है, बचा ले जो हर तूफान से उसे “आस” कहते हैं, बड़ा मज़बूत है ये धागा जिसे “विश्वास” कहते है।

भ्रम हमेशा रिश्तों को बिखेरता है और प्रेम से अजनबी भी बंध जाते है, किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के “समर्पण” की कद्र करे।

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