Saturday , November 17 2018
Home / Featured / प्रकृति के अनुकूल मनाना चाहिए दिवाली का त्योहार

प्रकृति के अनुकूल मनाना चाहिए दिवाली का त्योहार

उन्नाव।

हमारे देश में प्रत्येक वर्ष दिवाली के त्योहार के दौरान लाखों के तादाद में पटाखे फोड़े जाते हैं। इस त्योहार पर पटाखे फोड़ना लगभग एक रिवाज सा बन गया है। इस दौरान बाजार विभिन्न प्रकार के पटाखों से भरे पड़े होते हैं और लोग इनकी खरीददारी कुछ दिन पहले से ही शुरु कर देते हैं।

 

इस दौरान बच्चों में पटाखों को जलाने को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह देखा जाता है। हालांकि कई बार बच्चों के साथ बड़े भी पटाखे जलाने के इन गतिविधियों में हिस्सा ले लेते हैं और इस बात पर जरा भी विचार नही करते कि हमारे इन कार्यों द्वारा पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर कितना बढ़ जाता है। यहीं कारण है कि दिवाली के दौरान हमारे देश में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे कि कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां भी उत्पन्न हो जाती हैं।जो लोग अस्थमा तथा अन्य फेफड़े संबधित बीमारियों से ग्रसित होते हैं। उनके लिए दिवाली का समय और भी ज्यादा कष्टदायक हो जाता हैं, क्योंकि इस दौरान उनकी समस्याएं और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं तथा उनके लिए सांस लेना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। पटाखे जलाने के कारण ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी उत्पन्न होती है। जिससे कि बुजुर्ग और छोटे बच्चे मुख्य रुप से प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही पटाखों की तेज आवाज के कारण जानवर एवं पक्षी भी काफी डर जाते हैं और इधर-उधर छुप जाते हैं।

हम सब को याद रखना चाहिए कि दिवाली प्रकाश का पर्व है और हमे कम से कम पटाखे जलाने चाहिए ताकि प्रदूषण स्तर कम हो सके और दिवाली के त्योंहार को और भी अच्छे तरीके से प्रकृति के अनुकूल रुप से मनाने का प्रयास हमे करना चाहिए। यह वह समय है जब हमें समझना होगा की पटाखे जलाना त्योहार मनाना नही है बल्कि प्रदूषण को बढ़ावा देना है, जोकि हमारे प्रकृति और ग्रहों को गंभीर नुकसान पंहुचा रहे है।

 

रिपोर्ट-कुलदीप वर्मा

उन्नाव

Loading...

Check Also

उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों चिकित्सा प्रतिपूर्ति भी बन्द

लखनऊ। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को ...