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पैरों में कंपन या दर्द को ना करें अनदेखा, इस बड़ी बीमारी का हो सकता है संकेत

अक्सर देखा जाता है कि उम्र के साथ-साथ इंसान के शरीर के अंगों में दर्द, जलन एवं इत्यादि चीजें महसूस होने लगती है| हालांकि बढ़ती उम्र के साथ बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाता है| अगर पैर में कम्पन या एड़ियों में सूजन महसूस की जाती है, तो यह एक बीमारी के संकेत हैं जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है|

अक्सर पैर में कंपन और एड़ियों में सूजन को लोग सामान्य में ले लेते हैं, जिसकी वजह से उन्हें बाद में बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है| जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि पैरों में कंपन, खिंचाव या दर्द की शिकायत न्यूरोलॉजिकल डिजीज के लक्षण है| जब इंसान के शरीर में विटामिन बी-12 और आयरन की कमी होती है, तो यह समस्या उत्पन्न होने लगती है| इसका सही समय पर इलाज नहीं होने पर पार्किंसंस में बदल सकती है|

क्या है इसकी वजह ?

 

सामान्यतौर पर देखा जाता है कि पैरों की मांसपेशियों और जोड़ों का काम करने के लिए ब्रेन से सूचना मिलती रहती है, लेकिन कुर्सी पर बैठते या लेटते वक्त यह सूचना अपने आप रुक जाती है| अक्सर आप देखते हैं कि जब आप एक ही अवस्था में बैठे रहते हैं, तो उस समय पैरों की तरंगे रुक जाती है और कंपन होता रहता है| ब्रेन से निकलने वाला हार्मोन डोपामाइन इन तरंगों को कंट्रोल करता है| इसकी कमी से तरंगों का प्रभाव लगातार होता रहता है|

 

इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो डिलीवरी होने के पश्चात अपने आप समाप्त हो जाती है| डायबिटीज और किडनी के मरीजों को भी ऐसी समस्या उत्पन्न होना संभव है| इसके साथ ही शरीर में हार्मोन संबंधी असंतुलन होने की वजह से भी ऐसी समस्या होती है| कई बार अनुवांशिक कारणों की वजह से भी इस समस्या के लक्षण दिखाई देने लगते हैं| खासतौर पर आयरन और विटामिन B12 कि शरीर में कमी होने पर इसकी प्रमुख वजह है|

प्रमुख लक्षण

 

सामान्यतौर पर यह बीमारी किसी को भी हो सकती है लेकिन अधिकतर 40 साल की उम्र के बाद ही इसके लक्षण नजर आने लगते हैं| रिस्टलेस लेग सिंड्रोम होने पर दर्द के साथ कंपन, झनझनाहट और बेचैनी महसूस होती है| इसके साथ ही नींद पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है| जब पैरों में झनझनाहट महसूस होती है तो लगता है कि पैरों के भीतर कुछ रेंग रहा है, जिसे हिलाने डुलाने पर आराम मिलता है| सोने या बैठने में परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है लेकिन उठकर चलने से राहत मिलती है| अर्थराइटिस की स्थिति में सुबह सोकर उठने के बाद मनुष्य के पैरों में तेज गति से दर्द होता है, जबकि रात को लेटने के समय आराम मिलता है|

 

इलाज

  • खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, चिकन, अंडा और दूध से बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें|
  • शराब एवं सिगरेट से दूर रहे क्योंकि इनकी अत्यधिक सेवन से डोपामाइन की कमी हो जाती है, जिससे रिस्टलेस लेग सिंड्रोम की समस्या हो सकती है|
  • दर्द से राहत पाने के लिए आप पैरों की मालिश कर सकते हैं लेकिन यह ज्यादा लंबे समय तक कारगर नहीं है|
  • अगर आपको इस बीमारी के लक्षण नजर आ रहे हैं या आपके साथ ऐसी परेशानी है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उनके निर्देशों का पालन करें|
  • डोपामाइन हार्मोन का स्तर बढ़ाने वाली दवाओं के नियमित सेवन से यह बीमारी दूर हो जाती है|
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