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पैदा होते ही छाती के बाहर धड़क रहा दिल, सर्जरी की सुविधा न होने पर वापस बीपीएस मेडिकल कॉलेज भेजा

गोहाना. बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज में एक महिला ने ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसका दिल शरीर के बाहर है। डॉक्टरों की टीम नवजात का इलाज करने में जुटी हुई है। नवजात की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे के शरीर का पूरा विकास नहीं हुआ था।

सोनीपत निवासी गर्भवती महिला को परिजनों ने बुधवार को महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां में भर्ती कराया गया था, जहां महिला ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसका दिल शरीर के अंदर न होकर बाहर था। इसे देखकर डॉक्टर व स्टॉफ भी हैरान था। नवजात की हालत को देख डॉक्टरों ने उसे पीजीआई, रोहतक रेफर कर दिया था। परिजन जब बच्चे को लेकर पीजीआई, रोहतक में पहुंचे तो वहां से भी उसे वापस भेज दिया गया है।

डॉक्टरों का कहना था कि पीजीआई में भी सर्जरी की सुविधा नहीं थी। इसके बाद परिजन वापस मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां में आ गए, जहां पर डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की हालत गंभीर है। इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम गठित की गई है। ऐसा मामला सालों में एकाध सामने आता है।

पिछले वर्ष हुई थी शादी, पहला ही है बच्चा 
मूलरूप से सांदल खुर्द गांव निवासी रेखा की शादी वर्ष 2018 में सोनीपत निवासी तकदीर के साथ हुई थी। यह पहला बच्चा है। रेखा की बहन पूजा के अनुसार रेखा का पति मजदूरी करता है। परिवार की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है। जिसके चलते वे बड़े अस्पताल में बच्चे का इलाज करा सके। अब डॉक्टरों से उम्मीद है कि वे बच्चे का इलाज करके बचा लेंगे।

बच्चे की छाती का नहीं हुआ था पूरा विकास : डॉ. महेंद्रू 
गायनी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव महेंद्रू के अनुसार बच्चे की छाती का पूरा विकास नहीं हुआ। आमतौर पर गर्भ भ्रूण का विकास पूरा नहीं हो पाता है। दिल बाहर निकलने का मामला 8 से 10 लाख बच्चों में से एक या दो ही होता है। 90 प्रतिशत बच्चे अधिक समय तक जीवित नहीं रहते। डॉक्टर ने बताया कि गर्भवती होने के बाद महिला द्वारा खान-पान पर अधिक ध्यान न देना और गर्भ में जींस पूर्ण विकसित नहीं होने से बच्चे का पूरा विकास नहीं होता है।

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