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पूर्व लोकसभा सांसद स्व. विनोद खन्ना की धर्मपत्नी की शुरू

गुरदासपुर:आगामी लोकसभा चुनावों से पहले गुरदासपुर में अभिनेता और पूर्व लोकसभा सांसद स्व. विनोद खन्ना की धर्मपत्नी की शुरू हुई सरगर्मियों के कारण भाजपा के समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। विशेषकर कुछ दिन पहले कविता खन्ना ने सीधे रूप में स्पष्ट तौर पर गुरदासपुुर से टिकट पर अपनी दावेदारी जताई थी, जिसके बाद अब कई भाजपा नेताओं ने कोई प्रतिक्रम देने की बजाय चुप्पी धार ली है तथा कई नेता यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि हाईकमान जो फैसला करेगी, वह सभी को मंजूर होगा। मगर दूसरी तरफ अंदर चुनाव लड़ चुके स्वर्ण सलारिया स्वयं तो कोई भी प्रतिक्रम नहीं दे रहे, मगर उनके समर्थक निराशा व नाराजगी जाहिर करने के साथ-साथ यह भी कह रहे हैं कि ऐसा नहीं हो सकता कि भाजपा हाईकमान स्वर्ण सलारिया ने क्षेत्र में की कड़ी मेहनत को नजरअंदाज करके उस नेता को टिकट देगी, जिसको सिर्फ चुनावों के ही क्षेत्र की याद आती है।
कांग्रेस के गढ़ माने जाते इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 5 बार जीत चुकी सुखबंस कौर भिंडर को हराने के लिए 1998 में अकाली-भाजपा गठबंधन ने विनोद खन्ना को चुनाव मैदान में उतारा था, जिन्होंने लगातार 3 बार भिंडर को हराने के अलावा क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रशंसनीय काम किए थे। विशेष कर उनकी तरफ से बनाए गए 2 पुलों के कारण उन्हें पुलों के राजे भी कहकर बुलाया जाता था।खन्ना को हराने के लिए कांग्रेस ने 2009 में प्रताप सिंह बाजवा को चुनाव मैदान में उतारा और बाजवा विनोद खन्ना को हराने में सफल भी रहे, मगर 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान विनोद खन्ना ने सभी रिकार्ड तोड़ते हुए बाजवा को वोटों के बड़े अंतर से हराने और इस क्षेत्र में चौथी जीत दर्ज करने संबंधी सफलता हासिल की। विनोद खन्ना के निधन होने के बाद 2017 के दौरान हुए उपचुनाव में भाजपा ने विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना द्वारा टिकट की मांग किए जाने के बावजूद स्वर्ण सलारिया को चुनाव मैदान में उतारा मगर कई कारणों के चलते वह कांग्रेस के सुनील जाखड़ से करीब 2 लाख वोटों के बड़े अंतर से पराजित हो गए थे।
उप चुनाव हारने के बावजूद सलारिया ने इस क्षेत्र में अपनी सरगर्मियां रोकी नहीं और 2019 के चुनाव लडऩे के लिए भी पूरे जोर-शोर से तैयारियां शुरू की हुई हैं, मगर चुनाव वर्ष के दौरान प्रधानमंत्री ने गुरदासपुर में इस वर्ष की गई पहली रैली के दौरान जिस तरीके से कविता खन्ना ने फिर से क्षेत्र में एंट्री की और स्टेज से प्रधानमंत्री द्वारा खन्ना के अधूरे कार्यों को पूरा करने का प्रण लिया गया, उसने विनोद खन्ना के प्रशंसकों में नई जान डाल दी थी। इसके बाद करीब एक महीना गायब रहने के बाद अब जब कविता खन्ना ने फिर से गुरदासपुर और पठानकोट में जाकर अपनी दावेदारी जताई दी है तो उसने न सिर्फ सलारिया समर्थकों को बेचैन और निराश किया है, बल्कि इससे वर्करों में असमंजस वाली स्थिति बन गई है।

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