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पंजाब के चुनावी परिदृश्य से NRI गायब

जालंधर:पंजाब के चुनावी परिदृश्य से इस बार एन.आर.आई. गायब दिखाई दे रहे हैं। एन.आर.आई. का शोर किसी तरफ से भी सुनाई नहीं पड़ रहा है। 2014 में आम आदमी पार्टी का लोकसभा चुनाव में जोर चला था, जिस कारण इस पार्टी ने 4 सीटों पर जीत हासिल की थी तथा उस समय एन.आर.आइज ने विशेष रूप से आम आदमी पार्टी की खुलकर मदद की थी।

उसके बाद आम आदमी पार्टी का ग्राफ बढ़ता चला गया परंतु बाद में पंजाब विधानसभा के 2017 में हुए आम चुनावों के समय एन.आर.आइज 2 हिस्सों में बुरी तरह से बंट कर रह गए थे। एन.आर.आइज का ज्यादा शोर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिखाई पड़ता था परतु इस बार सोशल मीडिया पर एन.आर.आइज अधिक उत्साहित दिखाई नहीं दे रहे हैं। गांवों में एन.आर.आइज को लेकर कोई गतिविधि दिखाई नहीं दे रही है। एन.आर.आइज का मानना है कि जिन पार्टियों को उन्होंने 2014 में समर्थन दिया था, वह उनकी आकांक्षाओं पर पूरी नहीं उतर सकीं। आम आदमी पार्टी तो कई हिस्सों में बंट कर रह गई। इससे एन.आर.आइज को भारी झटका लगा तथा उन्होंने स्वयं को आम आदमी पार्टी से अलग कर लिया है।

एन.आर.आइज का मानना था कि वह 2014 में एक तरफा भूमिका में इसलिए दिखाई दिए थे क्योंकि वह चाहते थे कि शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों में सुधार हो। एन.आर.आइज ने अपने पैतृक गांवों में कई विकास प्रोजैक्टों को अडाप्ट किया हुआ है तथा उसके लिए वह समय-समय पर धनराशि भी भेजते रहते हैं। एन.आर. आइज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पंजाब में अब तेजी से सुधार होगा। एन.आर.आइज अब अपने आपको एक विशेष पार्टी से बांध कर नहीं रखना चाहते हैं। एन.आर.आइज निजी स्तर पर अपने-अपने समर्थक उम्मीदवारों के पक्ष में व्यक्तिगत स्तर पर अवश्य संपर्क साधे हुए हैं परन्तु एन.आर.आइज एक विशेष पार्टी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

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