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नोटिस भेजकर 30 दिन में जवाब मांगा,स्विस बैंक ने 50 भारतीय कारोबारियों के नाम उजागर किए

बर्न. स्विस सरकार ने विदेशों बैंकों में कालाधन रखने वाले 50 भारतीय कारोबारियों के नाम उजागर किए हैं। स्विस अधिकारियों ने खाताधारकों अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी भेजा है। इनमें ज्यादातर कोलकाता, मुंबई, गुजरात और बेंगलुरु के हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में जवाब के लिए 30 दिन का वक्त दिया जाता है। पिछले एक साल में 100 से ज्यादा भारतीय खाताधारकों के नाम सामने आ चुके हैं।

स्विस सरकार ने फेडरल गजट में कृष्ण भगवान रामचंद्र, पोतलुरी राजामोहन राव, कल्पेश हर्षद, कुलदीप धींगड़ा, भास्करन नलिनि, ललिताबेन चिमनभाई, संजय डालमिया, पंकज कुमार साराओगी, अनिल भारद्वाज, थरानी रेनू टीकमदास, महेश टीकमदास थरानी, सवानी विजय कन्हैयालाल, भास्करन थरूर, कल्पेश भाई पटेल, अजोय कुमार, दिनेश कुमार, रतन सिंह चौधरी और कठोतिया राकेश कुमार के नाम शामिल हैं।

इन नामों में केवल इनीशियल्स
हालांकि, स्विस बैंक के बहुत से खातों में भारतीय खाताधारकों के सिर्फ इनीशियल्स हैं। इनमें एनएसए, एमएमए, पीएएस, आरएएस, एबीकेआई, एपीएस, एएसबीके, एमएलए, एडीएस, आरपीएन, एमसीएस, जेएनवी, जेडी, एडी, वाईए, डीएम, एसएलएस, यूएल, एसएस, आरएन, वीएल, यूएल, ओपीएल, पीएम, पीकेके, बीएलएस, एसकेएन और जेकेजी शामिल हैं।

स्विस सरकार संदेहास्पद खातों की जानकारी दे रही

सूत्रों का कहना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सरकार ने कालेधन के खिलाफ सख्त कदम उठाए। स्विस बैंकों में पैसे रखने वाले भारतीयों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए काम किया। भारत और स्विटजरलैंड के बीच समझौता हुआ। इसके तहत स्विस सरकार उन कारोबारियों के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रही है, जो संदेह के घेरे में हैं। पिछले महीने ऐसे 14 खातों की जानकारी साझा करने से पहले नोटिस भेजा गया था।

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