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मरीज़ो के लिए ड़ॉक्टर भगवान के बराबर होता है लेकिन अगर उसी भगवान से और उसके मंदिर से मरीज़ो को कोई मदद ही न मिले तो मरीज कहा जाए? आए दिन स्वास्थ्य केंद्र में हिने वाली समस्याएं जैसे स्ट्रेचर नही मिली, एम्बुलेंस समय से नही पहुँची, ड़ॉक्टर उपस्थित नही थे तो मरीज ने दम तोड़ दिया यह सब हम सुनते और पढ़ते रहते है। यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि इससे लोग अपनी जान खो देते है। अभी कुछ महीने पहले कानपुर के सरकारी अस्पताल हैलट में सही समय पर एम्बुलेंस न मिलने पर 8 साल के बच्चे की जान चली गयी। वही कही- कही तो गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल के बाहर होने की खबर भी सुनने को मिलती है। कारण होता है कि अस्पातल में बेड नही थे। कही बिजली नही रहती तो कही पंखा नही है। यह सरकारी अस्पतालों का हाल हैं।

कई सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी खस्ता है की वहा डॉक्टर उपलब्ध नही होते तो कही जाँच करने वाली मशीनें खराब पाई जाती है। 108 न. से चलाई जाने वाली एम्बुलेंस सेवा भी समय से नही पहुँचती। स्वास्थ्य केंद्रों की यह हालत आएदिन बिगड़ती ही जा रही है। जिसमे अभी तक कोई सुधर नही आया है। कही अस्पतालों की हालत खराब है तो कही डॉक्टर लापरवाही करते है। स्वस्थ्य केन्द्रों की बढ़ती समस्याओ पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। प्राइवेट अस्पतालों जैसी सुविधाएं सरकारी अस्पतालो में भी होनी चाहिए। जिससे गरीब आदमी अपना इलाज आराम से करा सकें।

 दीपाली श्रीवास्तव..