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धर्म युध्ध और बदले की भावना कितने निर्दोष लोगो का बलिदान लेंगा..?

सदियों से दो धर्मो की लड़ाई में ओर 49 निर्दोष लोग मारे गये। दुनिया पर कौन राज करेंगा ख्रिस्ती या मुस्लिम इस धर्म युध्ध के तहत स्टोकहोम में एक उज़बेक आतंकी ने भीड़ के ऊपर गाडी चढ़ा कर कुछ लोगो को कुचल दिया जिसमे एक 11 साल की स्वीडिश लडकी की मौत देख कर आस्ट्रेलिया के २८ वर्षीय ब्रेंटन टेरेंट नामक एक युवक ने इसका बदला लेनी की ठान ली और अपने काम को अंजाम देने के लिए एक ऐसा देश पसंद किया जो अपनी शांति और सुरक्षा के लिए जगमसहुर है।

न्यूजीलैंड ने कभी सोचा भी न था ऐसा एक काला इतिहास बना दिया इस सिरफिरे ने। आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया और फेसबुक पर हमले का जीवंत प्रसारण कर दुनिया में खलबली मचा दी। उसने 74 पन्ने का एक अपना मेनिफेस्टो ट्विटर पर डाला जिसमे उसने कहा की उसे ये सब क्यों करना पड़ा और बाहर से आये लोग गोरो का राज खत्म करना चाहतें है। हम पर यानि इसाई समुदाय पर हावी होना चाहते है और ये जो पार्टी अभी शुरु हुई है ये उसका जवाब है…! उसके मेनिफेस्टो में कही कही नाजीवाद की बू भी आ रही है। न्यूजीलैंड में इमीग्रेशन मुस्लिमों की संख्या बढ़ गई है। हो सकता है उसे रोकने के लिए और दुनिया पर सिर्फ गोरो कही राज होंगा ये जताने के लिए उसने 49 निर्दोषों की बली दे दी।

किसीने खूब कहा है की गोरो की न कालो की दुनिया है दिलवालों की..लेकिन जिस तरह से जेहाद या धर्म युध्ध चल रहा है उसे देख लगता है की दिलवालों की कोई सुनवाई नहीं। बन्दुक की सुनवाई होंगी…! भारत को याद रखना चाहिए की इसी गोरो ने फिरंगियों ने करीब 200 साल तक काले भारत को गुलाम बनाया था। गोरे और काले के बीच भेदभाव का शिकार द.अफ्रीका में मोहनदास करमचन्द गाँधी को हुवा और भारत को मोहन के रुपमे गांधीजी मिले। जिन्होंने गोरो का राज ख़तम कर भारत को आज़ादी दिलवाई थी। न्यूजीलैंड में मस्जिद में अल्लाह् की बंदगी करने वाले निर्दोष थे। वे स्टोकहोम में हमला करने नहीं गये थे। लेकिन करे कोई भुगते कोई की राजनीति के शिकार ये 49 लोग हो गए। दो धर्मो के बीच की लड़ाई या जिहाद में निर्दोष मारे गये। अब इसका बदला लिया जायेंगा। फिर उसका बदला और बदले का बदले की राजनीति या धर्म युध्ध में ऐसे ही निर्दोष मारे जाते रहेंगे।

सभी धर्मो में समानता शन्ति भाईचारा सहनशीलता का उपदेश दिया जाता है। लेकिन उसका कितना पालन होता है ये बताने की जरुरत नहीं। इसका अंत कहा होंगा , कैसे होंगा…? कहीं तो कहना पड़ेंगा की बस, अब बहोत हो चूका..अब और नहीं। ये मामला न सिर्फ न्यूजीलैंड का है न आस्ट्रेलिया उया उजबेकिस्तान का। ये मामला मानवता और करुणा से जुड़ा है। जिसकी पहल किसी न किसी को तो करनी ही होंगी। यूनो को इसके लिए पहल करनी चाहिए। बुध्ध भगवान की भूमि भारत से इसकी पहल हो तो दुनिया सही मायने में भारत को सन्मान की द्रष्टि से देखेंगे। न्यूजीलैंड की ये घटना आखरी हो ऐसी आशा रखने में कुछ बुराई नही। मसला ये है की बुराई का खात्मा हो। अच्छाई की जीत हो। सभी धर्म एक समान हो। सभी धर्मो के बीच करुणा,शांति, प्रेम, सद्भावना हो। ताकि और कोई निर्दोषों को अपनी जान गवानी न पड़े। गोरो का राज हो न कालो का राज हो। सिर्फ दिलवालों का राज हो। वोह सुबह कभी तो आएँगी….कभी तो आएँगी..कभी तो आएँगी..!!!

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