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डोगरी सभ्यता में रमने को तैयार हैं कीडिय़ां गंडियाल के लोग

कठुआ:रावी दरिया के उस पार कीडिय़ां एवं गंडियाल दो पंचायतें बस अब डोगरी सभ्यता में रमने को तैयार हो गई है। देश की आजादी के बाद से जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क के लिए रावी दरिया पर पुल की मांग लोगों को लगभग पूरी हो गई है। करीब बीस हजार की आबादी अब पंजाब से होते हुए जिला मुख्यालय से जुडऩे के बजाय सीधा ही जिला मुख्यालय से जुड़ जाएगी। केंद्रीय राज्यमंत्री एवं स्थानीय सांसद डॉ जितेंद्र के प्रयासों से रावी दरिया पर पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। 106.70 करोड़ की भारी भरकम राशि से तैयार हो रही इस योजना पर पुल की अब फर्निशिंग का काम चल रहा है।

साथ ही पुल पर रोशनी आदि के लिए भी खंभे लगाने सहित अन्य बिजली संबंधी कार्य जारी है। परियोजना के तहत जराई चौक, गंडियाल और कीडियां गंडियाल पुल को रोशन करने के लिए 43 सोडियम वेपर लाइटों का इस्तेमाल किया जाएगा। यह पुल एक तरह से कीडिय़ां गंडियाल के लोगों की लाइफ लाइन साबित होगा। भाजपा जिला प्रधान प्रेम डोगरा ने इसे सौगात बताते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के सिवाय कुछ नहीं किया। केंद्र की मोदी सरकार ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए लोगों को यह एक तरह से तोहफा दिया है ताकि लोगों का सीधा संपर्क उस रियासत से हो, जहां के वे नागरिक हैं।

बसोहली में अटल सेतु का निर्माण करने वाली सिंगला कंपनी द्वारा ही इस पुल का निर्माण किया जा रहा है। योजना के तहत इस पुल का निर्माण कार्य मार्च 2019 तक पूरा करना निर्धारित किया गया था लेकिन कंपनी ने इस पुल का निर्माण पांच माह पहले ही कर दिया है। अगले माह इस पुल को लोगों को समर्पित करने की पूरी संभावना है। यही नहीं पुल के साथ साथ अपरोच मार्ग भी जराई चौक तक बनाया जा रहा है। फिलहाल साढ़े पांच किलोमीटर लंबी सडक़ में से लगभग ढ़ाई किलोमीटर तक काम पूरा कर लिया गया है। इस पुल के निर्माण के बाद यहां आर्थिक तौर पर भी मजबूती के साथ साथ रोजगार के नए साधन आम लोगों के लिए उपलब्ध होगे। यही नहीं जम्मू पठानकोट राजमार्ग पर आवाजाही के लिए यह कीडियां एक तरह से वैकल्पिक मार्ग के तौर पर भी इस्तेमाल होगा। इसी पुल से होकर शहर के लोग पठानकोट, अमृतसर या फिर जालंधर, दिल्ली आदि के लिए आवाजाही कर सकेंगे। उन्हें लखनपुर में जाम की समस्या से कोई परेशानी भी नहीं होगी।

पिछले कई दशकों से कीडिय़ां और गंडियाल के लोग रियासत जम्मू कश्मीर से एक तरह से कट चुके थे। भले ही वे राज्य जम्मू कश्मीर के नागरिक थे लेकिन सरकारों ने उन्हें पहले सीधे तौर पर रियासत के साथ जोडऩे को लेकर सिर्फ आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं दिया। पूर्व सरकारों द्वारा संजीदगी न दिखाने का नतीजा यह था कि उक्त पंचायतों के लोगों ने खुद को पूरी तरह से पड़ोसी राज्य पंजाब की सभ्यता में डाल दिया था। वहां रहने वाले लोगों के बच्चे भी पंजाब के स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ उच्च शिक्षा भी वहां ही संस्थानों में ग्रहण कर रहे थे। यही नहीं रियासत वासी होने के बावजूद वे मजबूरन सिम कार्ड भी पंजाब का इस्तेमाल करने को मजबूर थे।

जिला मुख्यालय तक आने के लिए लोगों को तीस किलोमीटर का सफर कर पंजाब से होकर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता था। या फिर दरिया के रास्ते को पार करने के बाद ही जिला मुख्यालय पहुंचते थे। एक तरह से अब पुल निर्माण से लोगों का सीधा संपर्क जिला मुख्ख्यालय से हो जाएगा। साथ ही वे एक तरह से डोगरी सभ्यता में भी रमेंगे। इससे पहले वे भाषा भी पंजाबी इस्तेमाल करते थे। पुल निर्माण के बाद इन पंचायतों के बच्चे रियासत के स्कूलों में आसानी से आवाजाही कर सकेंगे और रियासत की सभ्यता के साथ एक बार फिर मिल जाएंगे।

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