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झांसी:हासिल की विशिष्ट उपलब्धि बीयू के छात्रों ने भूसे से अल्कोहल बनाकर

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुन्देलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर में संचालित अभियांत्रिकी तथा प्रौद्योगिकी संस्थान के अन्तर्गत जैव तकनीकी अभियांत्रिकी विभाग (बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग) के छात्रों ने भूसे और गाजर घास का इस्तेमाल कर अल्कोहल बनाने की विधि विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। यह अपने आप में बुन्देलखंड के लिए एक विशिष्ट उपलब्धि है। बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग विभाग के समन्वयक इंजी.बृजेन्द्र शुक्ला ने बताया कि बी.टेक. बायोटेक्नोलॉजी के अन्तिम वर्ष के छात्रों के एक समूह ने उनके निर्देशन में लगभग अनुपयोगी गेंहू के भूसे तथा गाजर घास की सहायता से अल्कोहल बनाने की तकनीक विकसित करने में सफलता प्राप्त की है।

बी.टेक. अन्तिम वर्ष के विद्यार्थियों आस्था, उत्प्रेक्षा सिंह तथा निधि के समूह ने अपने पाठयक्रम के अन्तर्गत किए जाने वाले प्रोजेक्ट के अन्तर्गत यह कार्य करने में सफलता प्राप्त की है। अन्तिम वर्ष के छात्रों के प्रोजेक्ट वर्क के मूल्यांकन के लिए आए एमिटी विश्विद्यालय, नोयडा के प्रोफेसर ने भी छात्र समूह के इस कार्य की सराहना की है। इंजी शुक्ला ने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं के द्बारा लिग्नोसेल्यूलासिक पदार्थो गेंहू के भूसे तथा गाजर घास को प्री-ट्रीटमेंट तथा सूक्ष्म जीवाणुओं की सहायता से फरमंटेशन करके अल्कोहल बनाने में सफलता प्राप्त की है।

वर्तमान में लगभग सारे संसार में लिग्नोसेल्यूलासिक पदार्थो की सहायता से अल्कोहल प्राप्त करने पर शोध कार्य चल रहे हैं।फिलहाल शक्कर उद्योग से बाई प्रोडक्ट्स के रूप मे प्राप्त शीरे से ही अधिकांशत: अल्कोहल प्राप्त किया जाता है। यदि गेंहू का भूसा जोकि सामान्यत: ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों को खिलाने के लिए ही प्रयुक्त किया जाता है तथा गाजर घास जो कि पूर्णतया अनुपयुक्त है और खेती को भी नुकसान पहुंचाती है, इनकी सहायता से अल्कोहल के व्यावसायिक उत्पादन में सफलता प्राप्त होती है तो इस प्रकार प्राप्त अल्कोहल पारंपरिक रूप से प्राप्त अल्कोहल से काफी सस्ता होगा।

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