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जिमी शेरगिल बोले- आर्मी में जा नहीं पाया, लेकिन जब जवान का रोल करता हूं तो सुकून मिलता है

बॉलीवुड .  जिमी शेरगिल से मिलना हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के उस अभिनेता से मिलना है जिसकी आवाज़ और अंदाज़ में दबंगई और ठसक भरी है। बारिश के इस भीगते मौसम में जब भास्कर के दफ्तर में हम जिमी का इंतज़ार कर रहे थे, तो ‘तनु वेड्स मनु’, ‘साहब, बीवी और गैंगस्टर’, ‘ए वेड्नस्डे’ और ‘मुक्काबाज़’ जैसी फ़िल्मों के किरदारों की यही छवियां चल रही थी। पर उनके आते ही एक मीठी मुस्कान ने तुरंत यह छवि तोड़ी।

हिन्दी फ़िल्मों का एक बेहद चर्चित चेहरा आंखों पर लगा एविएटर और बढ़ी हुई दाढ़ी के बीच ‘मोहब्बतें’ के सीधे-साधे करन या ‘हासिल’ के अनिरुद्ध की ही याद दिला रहा था। बातें हुईं तो पंजाब की पैदाइश, मुंबई का सफर, फ़िल्मों में अभिनय, किरदारों की खासियत, दिल की नफ़ासत और मन की छुपी हुई ख्वाहिशों तक का रास्ता तय हुआ।

जिमी से हुई बातचीत के अंश

  1. पहला सवाल जिमी के शुरुआती दिनों की याद और एक्टिंग करने की इच्छाओं का था।

    जिमी बोले- मैंने पहले बी.कॉम किया, उसके बाद एमबीए करना चाहता था। पर बुआ के बेटे ने कहा- तुम्हें एक्टिंग में ट्राय करना चाहिए। एमबीए तो तुम बाद में भी कर सकते हो। मैंने सेल्फ एनालिसिस किया और मुंबई चला गया। वहां रोशन तनेजा की क्लास जॉइन की। इसी दौरान ‘माचिस’ में मौका मिला। फिर ‘मोहब्बतें’ में काम किया। इस तरह मेरा सफर शुरू हुआ।

  2. लवर बॉय और चॉकलेटी इमेज छोड़कर ग्रे किरदार करने लगे… ?

    जिमी- मोहब्बतें के बाद सभी मुझे वैसी ही भूमिका में देखना चाहते थे। मुझे नहीं लगता था कि मैं एक चॉकलेटी चेहरा हूं। मैंने सोचा अलग किरदार किए जाएं, जिनमें अलग शेड्स हों। जैसे ‘हासिल’, ‘मुन्नाभाई’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’। ये सभी किरदार आज तक लोगों के जेहन में हैं।

  3. बातें कहानी, नए निर्देशकों मसलन अनुराग कश्यप, तिगमांशु धूलिया, आनंद एल राय की होने लगीं। और फिर स्क्रिप्ट या निर्देशक के बीच फैसले को लेकर जिमी ने कहा – मैं बाउंड स्क्रिप्ट्स मंगवाता हूं और पूरी स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। स्क्रिप्ट को पढ़कर ही आप किरदार को सोच सकते हैं। हालांकि इन निर्देशकों ने बहुत भरोसा मुझ पर किया है। इसलिए कई बार केवल अच्छी फ़िल्म या निर्देशक के साथ काम करने का भी लालच होता है। ‘मुन्नाभाई’ जैसी फ़िल्में इसी तरह कर पाया।
  4. छोटे शहरों में मचल रहे नव-युवकों के सपनों से जुड़े एक सवाल पर जिमी ने कहा- मैं जब स्कूल में पढ़ता था तो आर्मी में जाना चाहता था। मैं जवानों से बहुत जुड़ाव महसूस करता हूं। वो परीक्षा पास नहीं कर पाया जिससे मैं आर्मी में दाखिला ले सकता था। जब पुलिस या आर्मी का किरदार करता हूं तो सुकून मिलता है। जैसे ‘यहां’ फ़िल्म मुझे इमोशनली बहुत करीब लगती है। आज ग्लैमर ने टैलेंट से हटकर जो रास्ते खोले हैं तो कभी-कभी हैरत भी होती है कि हमारे शहरों के अधिकतर युवा सर्विसेस में जाने का क्यों नहीं सोचते।
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