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जानिए भुजंगासन करने की सही विधि और इसके अनेक फायदे

सूर्य नमस्कार के द्वारा त्वचा संबंधी रोग समाप्त होते हैं और साथ ही साथ इनके होने की भी संभावना कम हो जाती है। सूर्य नमस्कार से कब्ज, पेट संबंधी रोग, उदर आदि रोगों से भी मुक्ति मिलती है और पाचन क्रिया भी अच्छी रहती है। सूर्य नमस्कार से अलग से आलस्य, अति निद्रा जैसे कई विकार दूर होते हैं। आज हम आपको सूर्य नमस्कार की विभिन्न क्रियाओं और उनसे होने वाले लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं l

सूर्य नमस्कार कि के अभ्यास की 12 स्थितियां / Surya namaskar

1- आप अपने दोनों हाथों को जोड़ लें और सीधा खड़ा हो जाए। इसके बाद आंखों को बंद करें। आज्ञा चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।

2- गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों के द्वारा कानों के ऊपर से सटाते हुए भुजा को ऊपर और गर्दन के पीछे की ओर झुकाते हुए विशुद्ध चक्र की ओर ध्यान केंद्रित करें।

3- सूर्य नमस्कार (Surya namaskar) की इस स्थिति में आप धीरे-धीरे सांस बाहर थोड़े और सिर को आगे की ओर ले जाएं। आप अपने हाथों को गर्दन के साथ कानों से सटाते हुए नीचे तक ले जाकर पैरों के नीचे दाएं बाएं पृथ्वी को स्पर्श करें। ध्यान रखें कि आपके घुटने सीधे रहें। जिन लोगों को रीढ़ एवं कमर का दर्द है, वे इस स्थिति में सूर्य नमस्कार ना करें।

4- पुनः एक बार सांस भरते हुए आप बाएं पैर के पीछे की ओर और छाती को खींचकर आगे की ओर करें। गर्दन का पीछे झुकाए। टांग सीधी करें और पैर का पंजा खड़ा कर ले। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहे। इस स्थिति में आप अपनी मुखाकृति सामान्य रखें।

5- सांस को धीरे-धीरे छोड़े। दाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं, अपने दोनों पैरों की एड़ियों को मिलाएं। पीछे की ओर शरीर को खींचाव दे। जितना हो सके आप अपने नितंबों को ऊपर की ओर उठाएं। इस स्थिति में आप सहस्रार चक्र पर अपना ध्यान केंद्रित करें।

6- सांस अंदर भरते हुए पृथ्वी के समानांतर सीधा साष्टांग दंडवत करें। आप अपने छाती और माथे को पृथ्वी पर तथा वाले नितंबों को ऊपर उठाएं। इस क्रिया को करते वक्त आपकी श्वास की गति सामान्य रहे।

 

7- सूर्य नमस्कार के इस स्थिति में आप अपनी सांस को धीरे-धीरे अंदर भरे, छाती (Chest ) को आगे की ओर खींचे और हाथों को सीधा करें। हाथों को गर्दन के पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी को स्पर्श करते रहे तथा आप के पंजे खड़े हो। मूलाधार को खींचकर ध्यान उसी पर लगायें।

8- सूर्य नमस्कार के अगली स्थिति में आप धीरे-धीरे सांस बाहर निकालते हुए दाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं, एड़ियों को मिलाएं। शरीर को पीछे की ओर छोड़ दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितंबों को ऊपर की ओर उठायें रखें। गर्दन (Neck) को नीचे की ओर झुका कर थोड़ी से मिलाने की कोशिश करें। आप इस आसन को करते वक्त अपना ध्यान सहस्रार चक्र’ पर केंद्रित करें।

9- सूर्य नमस्कार की इस स्थिति में आप सांस अंदर खींचते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं, छाती को आगे रखे, गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं, टांग (Leg) सीधी रखें और पीछे खींचे। आप थोड़ी देर इस स्थिति में ही रहे। आप अपने ध्यान को ‘स्वाधिष्ठान’ अथवा ‘विशुद्घि चक्र’ की ओर ही केंद्रित करें।

10- सूर्य नमस्कार की इस स्थिति में आप धीरे-धीरे सांस को बाहर निकालें और हाथों को कानों से सटाते आगे की ओर ले जायें और हाथ गर्दन के साथ नीचे होने चाहिए। आपके दोनों हाथ पृथ्वी को स्पर्श करें। आप के घुटने सीधे रहे। माथा भी घुटने को स्पर्श करते हुए नाभि  के पीछे मणिपुर चक्र पर केंद्रित करें। कुछ समय इसी अवस्था में रहे। जिन लोगों को कमर एवं रीड की हड्डी से संबंधित कोई भी परेशानी है, वे इस आसन को ना करें।

11- सूर्य नमस्कार की इस स्थिति में श्वांस अंदर की ओर भरते हुए कानो से सटाते हुए ऊपर की ओर ले जाए। अपनी भुजाओं और गर्दन के पीछे की ओर झुकाएं। आप अपने ध्यान को गर्दन के पीछे ‘विशुद्धि चक्र’ पर केंद्रित करें।

12- सूर्य नमस्कार की ये स्थिति पहली स्थिति की तरह ही है। आप पहले की तरह ही अपने शरीर के सभी अंगो को फैला ले।

इस सूर्य नमस्कार से आपका शरीर निरोग रहेगा। सूर्य नमस्कार की ये पूरी प्रक्रिया आपके लिए बहुत ही लाभकारी है। सूर्य नमस्कार के निरंतर अभ्यास से आपके हाथ-पैर के दर्द दूर होंगे। वो मजबूत होने लगेंगे। गर्दन, फेफड़े तथा पसलियों से संबंधित परेशानियां दूर होंगी और वो भी मजबूत होंगे। शरीर पर जमा चर्बी निकल जाएगी और आपका शरीर हल्का तथा स्वस्थ हो जाएगा।

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