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जब हर तीन लड़कियों में से एक को ही मिल पाता था पति।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश टैंक को शुरुआत में मेल और फीमेल में विभाजित किया गया था।मेल टैंक तोप होती थी जबकि फीमेल टैंक मशीन गन होती थी। प्रथम विश्व युद्ध में ‘लिटिल विली’ पहला टैंक था।

इस टैंक का निर्माण 1915 में किया गया था, जिसमें 3 लोग बैठ सकते थे और यह 4.8 की रफ्तार से चल सकता था। एक 48 टन एक बंदूक थी जिसे जर्मन सेना द्वारा प्रयोग किया जाता था। यह बंदूक 930 किलोग्राम के गोलों को 15 किलोमीटर तक की दूरी पर फायर कर सकती थी। हालांकि इसे असेंबल करने में 200 व्यक्तियों को 6 घंटे से ज्यादा समय लगता था।

1914 से 1918 तक लड़े गए प्रथम विश्व युद्ध को लगभग हर महासागर और हर द्वीप पर लड़ा गया था। हालांकि अधिकतर यूरोप में ही हुए थे यूरोप में ही लड़ा गया था।

फ्रांस पहला ऐसा देश था जिसने अपनी दुश्मन सेना के खिलाफ अशोक गैस आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया था। यह आंसू गैस के गोले उन्होंने जर्मन सेना के खिलाफ अगस्त 2000 अगस्त 1915 में फेंके थे। प्रथम विश्व युद्ध ने पहली बार भारी संख्या में मशीन गन का प्रयोग किया जाने लगा था।

आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पांच लाख से ज्यादा कबूतर संदेशवाहक का काम करते थे। जो हेड क्वार्टर से फ्रंटलाइन के बीच संदेश ले जाने और ले आने का काम करते थे। प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में पुरुषों की संख्या इस कदर कम हो गई थी कि हर तीन लड़कियों में से एक को ही पति मिल पाता था।

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