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जब इश्क़ के चक्कर में ग्यारहवीं में फ़ेल हो जाते थे

कुछ लोग कहते हैं जीवन में प्रेम एक बार होता है पर मैं कहता हूँ एक बार हो या अनेक बार किसी भी चीज़ का रिविज़न बार बार होना चाहिए।अब जब कहानी प्रेम की है तो मज़ा उस कहानी में ज़्यादा आता है जहां उतार चढ़ाव भी हों तो आज सुनाते हैं आपको आप बीती।

कक्षा ग्यारहवीं के हम छात्र थे आर्ट्स के विद्यार्थी थे,आर्ट्स इसलिए लिया क्योंकि गणित और विज्ञान में हालात टाइट थी।स्कूल भी नया था,उत्कृष्ट विद्यालय।हमारे कक्षा के सामने ही साइंस वालों की क्लास लगती थी।रिसेस की घंटी बजते ही साइंस क्लास के आगे पीछे चक्कर काटते रहते थे क्योंकि उस क्लास में पढ़ती थी-सोफ़िया मैथ्यूज़।

 

सिर्फ नाम ही अंग्रेज़ी नहीं था,माशाल्लाह शक्ल से भी फिरंग थी,पतली-दुबली,लंबे बाल जिस रंग का हेयर बैंड उस रंग की ही नेल पॉलिश।भई वाह! एक नज़र में सब ताड़ लिया हमने,आख़िर स्कूल जाते भी तो इसलिए ही थे पर बात कैसे करें,शुरू कहाँ से करें कुछ समझ न आता था।

हमारे ही कक्षा में पढ़ता था रिज़वान जो साइंस डिपार्टमेंट की हिना पर जान छिडकता था,हमारा लव गुरु भी वही था।तरह तरह के सुझाव हमें देता रहा हम लेते रहे।उसने बोला कि पहले कोई कॉमन बात ढूंढ जो तुझमे और सोफ़िया में एक जैसी हो और फ़िर बात कर,एक बार बात शुरू हो जाये तो आगे बढ़ाओ।मैंने भी आश्वाशन दिया कि बढ़ा तो मैं लूं, एक बार शुरू हो जाए।

एक बार फिर आई रिसेस,फिर दौड़ के पहुंचे साइंस क्लास के सामने।बाहर सोफ़िया अपनी सहेली संग निकली,हमने भी अपने जेब से निकाली रुमाल ज़मीन पे गिरा दी और पूरे रुबाब में बोले “सुनिए…..! यह रुमाल आपकी है?” जवाब मिला “नहीं”।पहली बार हमसे सोफिया ने कुछ बोला,अब तो बेटा उस दिन हम बादशाह थे।हल्की हल्की आई हुई मूंछों को ताव देने की कोशिश कर रहे थे।लवगुरु रिज़वान को बताया तो उसने बोला कि सोफिया का बर्थडे पता कर और एक चॉकलेट दे दे।भइय्या कसम से बेहद बढ़िया उपाय था।हिन्दू-मुस्लिम एकता का इससे बढ़िया सबूत कहीं देखने नहीं मिलेगा जहां एक हिन्दू,मुस्लिम की मदत ले कर एक ईसाई लड़की को पटाने का प्रयास कर रहा है यह भारत में ही संभव है।

जन्मदिन पता कर लिए,कम्बख़्त मार्च में आता था यह वो महीना है जब परीक्षाएं होती हैं।बर्थडे पर बधाई तो नहीं दे पाए पर परीक्षा के आख़िरी दिन पूछ ही लिए “कैसा गए आपके एग्जाम?” जवाब सामने से अंग्रेज़ी में आया,हमने भी दृढ़ संकल्प किया था कि डटे रहेंगे।2-3 मिनट बात हुई,उसके बाद मिस सोफ़िया ने हमें कहा “सी यू सून,बाय!” यह सुनकर हम फूले नहीं समाय।रिज़वान को बताए, बोला भइय्या मामला तुम्हारा सेट है।

 

ग्यारहवीं का रिजल्ट आया सोफ़िया 85% लाकर उत्तीर्ण हुई हम फेल हो गए इतिहास में।कमपार्टमेंट दिया किसी तरह बारहवीं में पहुंचे पता चला सोफ़िया कोटा चली गई है वहां किसी कोचिंग संस्थान में पढ़ने और हम रह गए अकेले पर सोफ़िया के चक्कर लगाते लगाते उसकी सहेली डिंपल से हमारी बात होने लगी थी।अब हमने डिंपल का बर्थडे पूंछा और उसे चॉक्लेट भी दे दी।जाना कहीं और चाहते थे और पहुंच गए कहीं और पर आज भी डिंपल हमारी ज़िन्दगी में है और अब वही हमारी ज़िंदगी है।

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