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चमकी बुखार से छह और बच्चों की मौत, 31 इलाजरत

मुजफ्फरपुर : चमकी बुखार से रविवार को छह बच्चों ने दम तोड़ दिया. वहीं, एसकेएमसीएच व केजरीवाल में 31 बच्चों को भर्ती किया गया है. इनमें एसकेएमसीएच में 22 व केजरीवाल अस्पताल में पांच बच्चे भर्ती हुए हैं. मृतकों में सात वर्षीय गोलू कुमार, सिलौत मनियारी, ढाई वर्षीया दिव्या कुमारी, सिमरा सकरा व चार वर्षीय अंकित कुमार, कांटी बताया गया है.

औराई के बभनगामा गांव निवासी रवींद्र पंडित की आठ वर्षीया पुत्री चांदनी कुमारी की तेज बुखार व चमकी आने से इलाज के दौरान मौत हो गयी. दो बच्चों की मौत एसकेएमसीएच लाने के दौरान रास्ते में ही हो गयी. उनका नाम व पता एसकेएमसीएच के रजिस्टर में दर्ज नहीं हो सका है. चमकी बुखार से मृतकों की संख्या पिछले एक सप्ताह से 31 से अधिक हो गयी है. वहीं, पीड़ित बच्चों की संख्या इस साल अब तक 78 से अधिक हो गयी है.

एसकेएमसीएच के दोनों पीआइसीयू फुल : पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने से एसकेएमसीएच के दो पीआइसीयू वार्ड फुल हो गये हैं. रविवार को तीसरा पीआइसीयू वार्ड खोला गया. डॉक्टरों को इन गंभीर मरीजों को लाइन में लगाकर पीआइसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है.

एसकेएमसीएच के विभागाध्यक्ष डॉ गोपालशंकर सहनी स्वयं सुबह से पीआइसीयू में इलाज कर रहे हैं. उनके साथ सीनियर व जूनियर डॉक्टर भी लगे हैं. एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ सुनील शाही भी पीआइसीयू परिसर के आसपास के अन्य वार्डों में खुद ही कमान संभाले हुए हैं. डॉ सहनी ने बताया कि मौसम के कारण ऐसा हो रहा है. बच्चों को प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज कर जिंदगी बचाने की कोशिश हो रही है.

पटना : दिमागी बुखार से नहीं, हाइपोगेलिशिमिया से हुई बच्चों की मौत : स्वास्थ्य विभाग

पटना : मुजफ्फरपुर और गया में पिछले कुछ दिनों में हुई चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि यह मौत जेइ व एइएस से नहीं हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को पत्र जारी कर कहा कि अभी तक आठ बच्चों में जेइ पॉजिटिव के लक्षण मिले हैं. एइएस से चार बच्चे बीमार हुए हैं, लेकिन इन दोनों बीमारी से कोई मौत नहीं हुई है. विभाग ने कहा कि जिन 10 बच्चों की मौत हुई है, उसका कारण हाइपोगेलेशिमिया है.

विभाग ने कहा, ऐसे बचें हाइपोगेलेशिमिया से : विभाग के मुताबिक इस वर्ष सर्वाधिक मृत्यु हाइपोगेलेशिमिया यानी ब्लड सूगर कम होने से हुई है.

इसका कारण अत्यधिक गर्मी, आर्द्रता एवं बारिश का नहीं होना है. बीमारी से बचाने के लिए बच्चों को धूप से बचाएं. क्योंकि, इसके कारण दस्त की शिकायत होती है और इसके बाद बच्चों की रुचि भोजन व पानी में कम हो जाती है और फिर हाइपोगेलेशिमिया बीमारी उत्पन्न होती है.

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