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चक्कीचलनासन के नियमित अभ्यास से ये बीमारियां होती है दूर

इस आसन में भारतीय गावों में पाए जाने वाली, हाथों से चलाने वाली गेहूँ की चक्की को चलाने की नक़ल की जाती है। यह एक बहुत अच्छा व आनंदायक व्यायाम है।

चक्कीचलनासन करने की विधि

  • दोनों पैरों को पूरी तरह फैलाकर बैठ जाएँ, हाथों को पकड़ते हुए बाजुओं को कन्धों की सीध् में अपने सामने की ओर रखें।
  • लंबी गहरी साँस लेते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे लाएँ और एक काल्पनिक घेरा/गोला बनाते हुए दाहिनी ओर हिलाना शुरू करें।
  • साँस भरते हुए आगे और दाहिनी ओर जाएँ और साँस छोड़ते हुए पीछे एवं बहिनी ओर। आगे से दाहिनी ओर जाते हुए साँस भरें।
  • श्री श्री योग शिक्षक के सुझावः निचले हिस्से में खिंचाव महसूस करें और पैरों को स्थिर रखें। धड़ के घूमने के कारण पैरों में हलकी गति स्वाभाविक है। बाजु पीठ के साथ घूमेगी।
  • घूमते हुए लंबी गहरी साँस लेते रहें। क्या आपको बाजुओं,उदर,कटि प्रदेश एवं पैरों में खिंचाव महसूस हो रहा है?
  • दिशा में 5 – 10 राउंड करने के बाद दूसरी दिशा में दोहराएँ।

चक्कीचलनासन के लाभ

  • सियाटिका रोकने में लाभप्रद
  • पीठ,उदर एवं बाजुओं की मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है।
  • छाती एवं कटि प्रदेश में फैलाव पैदा करता है।
  • महिलाओं की गर्भाशय की मांसपेशियों का व्यायाम,निरंतर अभ्यास से पीड़ादायमासिक चक्र से आराम मिलता है।
  • निरंतर अभ्यास से उदरीय वसा में कमी।
  • गर्भावस्था के दौरान जमा वसा को कम करने में बेहद कारगर। (इस मुद्रा को करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लें)

सावधानियां

  • निम्नलिखित स्थितियों में चक्कीचलनासन न करें
  • गर्भावस्था
  • कम रक्तचाप
  • पीठ के निचले हिस्से में अत्यधिक पीड़ा(स्लिप डिस्क की वजह से)
  • सिर दर्द, माइग्रेन
  • अगर सर्जरी (जैसे हर्निया)हुई हो।
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