Home / उत्तर प्रदेश / चंपा में कूट-कूट कर भरा था जीवट, लेकिन साथ छोड़ दिया जिस्म

चंपा में कूट-कूट कर भरा था जीवट, लेकिन साथ छोड़ दिया जिस्म

तमाम कोशिशों के बावजूद आखिरकार बुधवार को रायबरेली की चंपा जीवन की जंग हार गई. 10 दिनों से मादा हाथी चंपा का इलाज चल रहा था, लेकिन हालात बिगड़ने पर सुबह उसकी मौत हो गई. चंपा की मौत के लिए हाथी के स्वामी द्वारा बरती गई लापरवाही को माना गया है. पशु चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा चंपा का पोस्टमार्टम किया गया है.

बाँदा के जरौली कोठी निवासी सुखदेव गिरि चंपा नामक मादा हाथी के साथ करीब 10 दिन पहले लालगंज के तौधकपुर गांव पहुंचे थे. उनके पास इस हाथी का स्वामित्व है और वह गांव-गांव घूमकर भिक्षाटन करते हैं. 6 जनवरी को मादा हाथी चंपा की अचानक तबियत बिगड़ गई, उसके पैर में इंफेक्शन था.

हालात बिगड़ने पर सुखदेव गिरी द्वारा डीएफओ तुलसीदास से इस बाबत मदद मांगी गई. डीएफओ ने मथुरा के एलिफेंट कंजर्वेशन एंड रिसर्च सेंटर से संपर्क किया. वहां से डॉ.राहुल और एस इलैया राजा के नेतृत्व में एक टीम इलाज के लिए तौधकपुर पहुंची और चंपा का इलाज शुरू किया गया.

एक बड़ा टीला बनाकर उसपर हाथी को लिटाकर डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने इलाज शुरू किया, लेकिन मंगलवार रात में उसकी हालत बिगड़ गई और बुधवार की सुबह चंपा ने दम तोड़ दिया. डॉक्टरों के मुताबिक पैर में हुए इंफेक्शन के पूरे शरीर में फैलने की वजह से हाथी की मौत हुई है.

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