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ग्वांतानमो बे सबसे महंगी जेल: एक कैदी पर सालाना 93 करोड़ और तैनात सैनिकों पर 3900 करोड़ रु. खर्च

हवाना. कैदियों पर अत्याचारों के लिए कुख्यात रही क्यूबा की ग्वांतानमो बे जेल दुनिया की सबसे महंगी जेल है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। यहां इस वक्त 40 कैदी हैं। हर कैदी पर सालाना 13 मिलियन डॉलर (करीब 93 करोड़ रुपए) खर्च हो रहे हैं। वहीं, इनकी सुरक्षा में तैनात सैनिकों पर हर साल 540 मिलियन डॉलर (करीब 3900 करोड़ रुपए) का खर्च आ रहा है।

1985 में जर्मनी की स्पेन्दाउ जेल में कैद रहे नाजी युद्ध के अपराधी रुडोल्फ हेस का सालाना खर्च महज 1.5 मिलियन (करीब 10.7 करोड़ रुपए) आया था। वहीं, अत्याधुनिक प्रणाली से लैस मानी जाने वाली अमेरिका की कोलोराडो जेल में 2012 में एक कैदी का सालाना खर्च 78 हजार डॉलर (56 लाख रुपए) आया था। 1985 की स्पेन्दाउ जेल से तुलना करें तो ग्वांतानमो बे में एक कैदी के खर्च में 745% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

क्यूबा के साउथ-ईस्ट कोस्ट पर है जेल
क्यूबा के दक्षिण-पूर्वी तट पर अमेरिका ने 1898 में ग्वांतानमो बे नेवी बेस बनाया था। बाद में यहां डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) बनाया गया। जॉर्ज डब्ल्यू बुश (2001-09) ने यहां एक कंपाउंड बनवाया, जिसे कैंप एक्स-रे नाम दिया गया था। यहां आतंकियों को रखा जाता था।

ग्वांतानमो बे में करीब 1800 सैनिक तैनात रहते हैं। एक कैदी पर करीब 45 सैनिकों की नियुक्ति रहती है। सैनिकों पर जेल की तीन इमारतों, दो खुफिया हेडक्वार्टर्स, तीन अस्पतालों और कैदियों की मदद के लिए बनाए गए वकीलों के कंपाउंड का जिम्मा रहता है।

स्टाफ-कैदियों के लिए काफी सुविधा
ग्वांतानमो बे के स्टाफ के लिए चर्च और सिनेमा की व्यवस्था है। साथ ही उनके लिए डाइनिंग रूम और मानसिक हालत ठीक रखने के लिए केयरटेकर टीम है। स्टाफ के सपोर्ट के लिए हर हफ्ते जज, वकील, पत्रकार आते रहते हैं। वहीं, कैदियों के लिए मांसाहारी भोजन, न्यूज-स्पोर्ट्स चैनल, जिम और प्ले स्टेशन हैं। कैदियों चाहें तो वे आर्ट्स और हॉर्टीकल्चर क्लासेस में शामिल हो सकते हैं।

2003 में 600 से ज्यादा कैदी थे
ग्वांतानमो बे के कैप्टन और वकील ब्रायन एल माइजर का कहना है- जेल को आप अमेरिका के एक छोटे बूटीक की तरह देख सकते हैं। यहां पर अलग-अलग समय पर करीब 770 पुरुष (युद्धबंदी) रह चुके हैं। 2003 में यहां कैदियों की संख्या 677 तक पहुंच गई थी। 2008 में यहां आखिरी बार किसी कैदी को लाया गया था।

बुश प्रशासन ने यहां से 540 कैदियों को रिहा कर दिया था, इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब भेजा गया। इसके बाद ओबामा प्रशासन ने 200 कैदियों को रिहा किया। भले ही ग्वांतानमो बे में कैदियों को रखना काफी महंगा साबित हो रहा हो, डिटेंशन सेंटर बंद करने को लेकर अमेरिका में फिलहाल कोई राजनीतिक एकराय नहीं बनी है।

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