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खेती गायब और अब किसानो की राशि भी गायब…? क्या है सच्चाई..?

देश के अन्नदाता किसान की किसानी पानी पर निर्भर है। पानी है तो खेतीबाड़ी है। पानी नहीं तो कुछ भी नहीं। भारत में ज्यादातर किसान मानसूनी खेती पर निर्भर है। मानसून में पानी बरसा तो किसान के घर भी खुशीयों की बारिश होती है। किसान कर्ज लेकर भी खेती करके देशवासियों का पेट भरता है। कर्जदार किसानो का कर्जा माफ़ करने के वायदे दियें जाते है। कही पुरे होते है कहीं नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी की सरकार ने कर्जा माफ़ करने के बजाय छोटे और सीमान्त किसानो को हर वर्ष ६ हजार रुपये उसके खाते में जमा करने की योजना लागू की है। पहली क़िस्त के 2 हजार की राशि कब एक करोड़ से ज्यादा किसानो के खाते में जमा हो गई। इस पर राजनीति भी हुई। अब प्रतिपक्ष द्वारा ये दावा किया जरह है की किसानो के खाते में 2 हजार जमा होने के 24 घंटो में ही ये राशि वापस ले ली गई। सपा के नेता अखिलेश यादव ने दावा किया की कई किसानो के खातों मे से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि वापस सरकार ने ले ली। जब ये योजना लागू की गई उस वक्त खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने कहा था की विरोधी द्वारा ये बातें फैलाई जायेंगी की राशि जमा होते ही सरकार इस वापस ले लेंगी। और ऐसा ही हुआ। अखिलेश यादव ने भी यही कहा जो प्रधानमत्रीजी ने कहा था। लेकिन इसमें सच्चाई कितनी इसका खुलासा होना चाहियें।

भारत मौर विश्व के कई देशो में जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती प्रभावित हो रही है। जिससे किसान परेशां है। ख़ास कर जो किसान पारंपरिक ढब से आज भी खेती कर रहे है और आधुनिक खेती के उपायों से परिचित नहीं ऊनकी खेती गायब हो रही है। सरकार ने ऐसे किसान समेत कर्जदार किसानो को बचाने के लिए नई योजना लागु कर लाखोँ किसानो को राहत पहुंचाई है। लेकिन यदि उनके खातों से सरकारी सहायता की राशि वापस ली गई या ली जा रही है तो उसकी जांच होनी चाहियें। और यदि ऐसा नहीं है तथा सपा के नेता झूठ फैला रहे है तो उन पर कार्यवाही होनी चाहिए। क्योंकी ये लाखोँ किसानो को भ्रमित करने की गहरी साजिश भी हो सकती है। सरकार के दावे को ललकारना ये प्रतिपक्ष का काम है। ऐसा नहीं की केन्द्र में भाजपा की सरकार है इसलिए अखिलेश यादव ऐसा आरोप लगा रहे है। इसी यूपी में जब अखिलेश की सरकार थी तब भाजपा ने उनकी सरकार के कई दावो को ललकारा था।

चेलेन्ज किया था, कई खुलासे मांगे थे। जिसका जवाब भी दिया गया होंगा। इसलिए अब भाजपा की बारी है की वे प्रतिपक्ष के दावें का जवाब दे और जो किसान भ्रमित है उनकी शंका दूर करे।
किसान निदई योजना के तहत सरकार द्वारा फिर एक बार 2 हजार की क़िस्त एक करोड़ से भी ज्यादा किसानो के खातों में जमा होने जा रहे है और उसे आदर्श आचारसंहिता का भंग नहीं माना जायेंगा। क्योंकि ये योजना चुनाव घोषित होने से पहले ही लागू की गई है। हो सकता है की किसी दल द्वारा इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जायेंगी। लेकिन महत्वपूर्ण ये है की क्या वाकई में किसानो के खातों से सहायता राशि वापस ली जा रही है क्या..? क्या कोई बीच के अफसर या सरकारी कर्मी या कोई बेंक के कर्मी ऐसा खेल खेल रहे है…? इसकी जांच तो बनती है। क्यों की धुवाँ उठा है तो आग कही न कही सुलग रही होंगी।

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