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खुद को खुश रखिए, वह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है

खेल में हम सदा ईमानदारी का पल्ला पकड़कर चलते है,

पर अफ़सोस है कि कर्म में हम इस ओर ध्यान तक नहीं देते।

कर्म का मूल्य उसके बाहरी रूप और बाहरी फल में इतना नहीं है,

जितना की उसके द्वारा हमारे भीतर दिव्यता की वृद्धि होने में है।

खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया,

दोस्तों के लिए दोस्ती का रिश्ता बनाया,

पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी कायम,

जिसने दोस्ती को दिल से निभाया।

हाथों की लकीरों पर गुमान मत करना,

किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते।

 

कर्म करने और उसका फल पाने के बीच लम्बा समय लगता है,

जिसकी प्रतीक्षा धैर्य पूर्वक करनी पड़ती है।

बीज को वृक्ष बनने में कुछ समय लगता है।

अखाड़े में दाखिल होते ही कोई पहलवान नहीं हो जाता।

विद्यालय में प्रवेश पाते ही कोई ज्ञानी नहीं हो जाता।

कामयाबी धैर्य से मिलती है, कर्मक्षेत्र चाहे कोई भी हो।

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