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कौन था भूरिश्रवा और किस प्रकार से महाभारत युद्ध में हुआ था उसका अंत ? आइये जानते है

महाभारत महाकाव्य में, अभी भी छिपे हुए रहस्य हैं जिन्हें खोलना बाकी है। दुनिया के महान योद्धाओं ने महाभारत युद्ध में भाग लिया। उन बहादुर योद्धाओं में से एक भूरिश्रवा थे जिन्होंने कौरवों की ओर से युद्ध में भाग लिया था। भूरिश्रवा के दादा बहिलिका राजा शांतनु के बड़े भाई थे, इसी कारण से भूरिश्रवा एक कुरुवंशी थे।

बात उस समय की है जब पांडवों की ओर से लड़ने वाले सत्य कौरवों की सेना में आतंक का पर्याय थे। कौरवों की सेना के कई वीर योद्धा उनके शिकार बन गए थे। तभी भूरिश्रवा ने सात्यकि के दस पुत्रों को मार डाला। तभी भूरिश्रवा और सत्य संगम भ्रमित हो गए। दोनों योद्धाओं के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। दोनों के बीच लड़ाई पहले एक धनुष की थी। उसके बाद दोनों ने भयंकर युद्ध शुरू कर दिया। उसके बाद दोनों में तलवार से युद्ध शुरू हो गया। फिर अचानक सत्य की तलवार हाथ से छूट गई।

 

भूरिश्रवा ने मौके का फायदा उठाया और सत्यकी को जमीन में फेंक दिया। और वह गले में अपनी तलवार से हमला करने वाला था। सात्यकि उस समय अर्जुन को देख रहे थे, मदद की तलाश कर रहे थे। अर्जुन ने समय नष्टकिये भूरिश्रवा का तलवार वाला हाथ बाणों से काट दिया। अर्जुन द्वारा किया गया यह कार्य पूरी तरह से नियम के विरुद्ध था। अर्जुन द्वारा किए गए इस कार्य के कारण,भूरिश्रवा युद्ध भूमि में ही अनशन पर बैठे गए। तभी सात्यकि ने अनशन पे बैठे निहत्थे भूरिश्रवा पर तलवार से हमला करके उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।

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