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कोचिंग सेंटर स्टूडेंट्स को बना रहे बीमार

नई दिल्ली :एक अध्ययन के मुताबिक, कोचिंग सेंटरों में भीड़, घंटों एक ही जगह बैठे रहने और पीठ को आराम न मिलने से स्टूडेंट्स की मांसपेशियों में दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। अध्ययन में शामिल 16 से 22 साल के 87 प्रतिशत स्टूडेंट्स मांसपेशियों के दर्द से जूझते मिले जबकि पहले उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। इस अध्ययन में शामिल सफदरजंग अस्पताल के डॉ हर्षानंद पोपलवार ने बताया कि एम्स भोपाल की मदद से डॉ आशुतोष संतोषी की अगुआई में यह स्टडी की गई। डॉ. हर्षानंद ने बताया कि हमने 5 कोचिंग सेंटरों को चुना और ऐसे 488 स्टूडेंट्स को स्टडी में शामिल किया जो 14 से 16 महीने कोचिंग कर चुके थे और रोजाना ढाई से 3 घंटे कोचिंग ले रहे थे। ये पूरे दिन में औसतन 5 घंटे पढ़ते थे। इसमें 64 प्रतिशत लड़के और 36 प्रतिशत लड़कियां शामिल थीं।

इस स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले आए। 87.1 प्रतिशत स्टूडेंट्स मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर के शिकार पाए गए। एमएसडी को आसान शब्दों में मांसपेशियों की परेशानी कहा जाता है। यह मांसपेशी गर्दन, कमर का निचला हिस्सा, एड़ी, पीठ का ऊपरी हिस्सा, कंधा, घुटना, कलाई कहीं की भी हो सकती है। डॉ. हर्षानंद ने बताया कि अधिकतर कोचिंग सेंटरों में बच्चे बेंच पर बैठते हैं, जिसमें पीठ को पीछे से सपॉर्ट नहीं मिलता। ये फिजिकल ऐक्टिविटी नहीं करते, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। अध्ययन में कहा गया है कि करियर संवारने के सपने दिखाने वाले कोचिंग सेंटर स्टूडेंट्स को बीमार बना रहे हैं।

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