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किडनी डोनर और रिसीवर को दिखाया जाता था रिश्तेदार, फर्जी डीएनए रिपोर्ट होती थी तैयार

कानपुर. राजधानी दिल्ली स्थित पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ की किडनी रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद अब इस नेटवर्क के काम करने के तरीकों के बारे में खुलासे हो रहे हैं। पुलिस ने सीईओ दीपक शुक्ला से हुई पूछताछ के आधार पर दावा किया कि इसमें डोनर और रीसीवर को आपस में रिश्तेदार बताया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट में सबसे बड़ा खेल डीएनए सैंपल बदलने और फर्जी दस्तावेज को तैयार करने में होता था। इसी के जरिए डोनर (किडनी देने वाला) और रिसीवर (किडनी लेने वाला) रिश्तेदार दिखाए जाते थे। ये पूरा हेरफेर हॉस्पिटल के कोऑर्डिनेटर, डोनर प्रोवाइडर के साथ मिलकर करते थे। इसकी पूरी जानकारी डॉक्टर दीपक शुक्ला को रहती थी। पीएसआरआई के लैब इंचार्ज सहित अन्य डॉक्टर भी इसमें संलिप्त हैं।

नियमों के मुताबिक, मरीज का रिश्तेदार ही किडनी या लिवर डोनेट कर सकता है। इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया है। एसपी क्राइम ने बताया कि कोऑर्डिनेटर फर्जीवाड़ा कर मरीज के सही रिश्तेदार की डीएनए जांच करवाता था। इसके बाद इस रिपोर्ट को डोनर की डीएनए रिपोर्ट बताकर अधिकारियों के सामने रखी जाती थी। यहां पर जांच में सब कुछ सही बताकर फाइल आगे बढ़ा दी जाती है और आखिर में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। ये पूरा खेल पीएसआरआई की लैब में ही होता था।

कोऑर्डिनेटर ने लिया स्टे
मामलेे में पीएसआरआई की कोऑर्डिनेटर सुनीता प्रभाकरण और मिथुन भी आरोपी हैं। दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। इसलिए उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई। पुलिस अब उनको पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगी।

पुलिस हिरासत में पीएसआरआई का सीईओ

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