Thursday , December 13 2018
Home / देश / उत्तर भारतीय तशद्दुद के शिकार

उत्तर भारतीय तशद्दुद के शिकार

कानपुर :ऐसा लगता है कि देश में एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है किसी एक व्यक्ति के अपराध की सजा उसके पूरे समुदाय को देना कहां तक सही है , जी हां समाज में अब ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है , कभी बच्चा चोरी के नाम पर भीड़ तंत्र आरोपी के पूरे समुदाय को निशाना बनाती है कभी गौ हत्या के नाम पर भीड़ एक पूरे समुदाय के संपत्ति दुकानों को नेस्तनाबूद कर देती है तो कभी रेप के नाम पर किसी समुदाय विशेष को टारगेट किया जाता है

अब ऐसे ही घटना गुजरात मे देखने को मिल रही है जिसने गांधी जी की उस सपने को तोड़ने का काम किया है जिसमें उन्होंने समूचे भारत वर्ष को एक धागे में बांधने की कल्पना की थी.

जी हां गुजरात में एक 14 माह की बच्ची के रेप होने के बाद जिस तरीके से एक आरोपी 19 साल बिहारी युवक के विरोध में उत्तर भारतीयों को धमकाये जाने के बाद हजारों की संख्या में उत्तर भारतीयों का पलायन हुआ है वह बहुत निंदनीय है और देश की एकता और अखंडता के लिए बहुत घातक है

अभी महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुई हिंसा के जख्म भरे भी नहीं कि गुजरातीयो ने एक बार फिर से उत्तर भारतीयों के जख्मों को हरा कर दिया.सवाल ये उठता है उत्तर भारतीय जो अपनी मेहनत से खून पसीने से औद्योगिकीकरण को गति देते हैं हैं और उसी औद्योगिकीकरण के बहाने पूरे देश में गुजरात मॉडल महाराष्ट्र मॉडल का ढिंढोरा पीटा जाता है लेकिन उनकी मेहनत के पसीने सूखने से पहले ही उन्हें भेदभाव और हीन भावना का शिकार होना पड़ता पड़ता है यह बहुत शर्मनाक है

यूपी की बैसाखी पकड़ कर दिल्ली के लाल किले तक का सफर करने वाले राजनीतिक दल के नेता राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप करने को ही वह अपना कर्तव्य मानते है राजनीतिक दल याद रखे उत्तर भारतीय सीधे हैं भोले हैं मेहनती हैं लेकिन बेवकूफ नहीं है आने वाले चुनाव में उत्तर भारतीय इसका बदला जरूर लेंगे

बीते दो-तीन दिनों में लगभग 20 हजार से ज्यादा उत्तर भारतीय गुजरात छोड़ कर उत्तर प्रदेश और बिहार को प्रस्थान किए हैं राज्य सरकार उनको सुरक्षा दिलाएं जाने के बजाय उनको वापस गुजरात बुलाने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी कर रही है इतनी बड़ी घटना फिर से राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ गई है

ये समय था उत्तर भारतीयों को सुरक्षा का भरोसा दिलाये जाने का , उनको वापस गुजरात बुलाये जाने का परन्तु इस कठिन समय सत्ताधारी और विपक्ष के लोगो का एक दूसरे की खिलाफ बयानबाजी करना ये दिखाता है कि वे कितने संवेदनशील हैं  इस पूरी घटना के पीछे कांग्रेसी नेता अल्पेश ठाकोर का नाम लेकर सरकार अपना पल्ला झाड़ रही है लेकिन गुजरात की सरकार को जवाब तो देना ही होगा कि उनके राज्य में एक 14 माह की बच्ची का रेप होता है उसके बाद स्थितियां इतनी भयावह हो जाती हैं कि 20 हजार लोग पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं इसका जिम्मेदार कौन होगा जिम्मेदारी तो लेनी होगी और कांग्रेस का एक एमएलए अल्पेश ठाकोर दोषी है या नहीं है यह जांच का विषय है परंतु अगर वह दोषी है तो वह इतना अधिक प्रभावशाली कैसे हो गया की आपका प्रशासन उसके सामने बौना साबित हुआ है उसकी दंगा समर्थित नीतियां सफल हो जाती है और आपका पुलिश प्रशासन नियम कानून ध्वस्त हो जाते हैं

सत्ता के लोगों का काम बयानबाजी नहीं एक्शन लेना है यदि सरकार के पास अल्पेश ठाकोर के ख़िलाफ़ कोई सबूत है तो गुजरात पुलिस कि लंबे हाथ अल्पेश ठाकुर कि पहुँच से दूर क्यों है ? यह घटना 2019 में मोदी की नाव डुबाने की साजिश है या कांग्रेस ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है यह आने वाले समय जनता इंसाफ करेगी.परंतु अभी सरकार को चाहिए जो दोषी हैं उन पर कठोरतम कार्रवाई करें और जो लोग पलायन करके जा चुके हैं उनको सुरक्षा प्रदान की जाए और उनको आश्वासन दिया जाए कि वह यहाँ पर सुरक्षित हैं उनको वापस लाया जाए ताकि गरीब मजदूर के परिवार का सही से भरण पोषण हो सके और गुजराती कारोबारी और इंडस्ट्रीज के मालिकों की चेहरे की उड़ी हुई रंगत फिर से चमक सके.
जफर सिद्दीकी
कानपुर विश्वविद्यालय

Loading...

Check Also

परीक्षा से वंचित दो छात्र, कोर्ट ने दिया परीक्षा में लेने का आदेश

बिलासपुर:छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में परीक्षा में बैठने से वंचित हुए दो छात्रों की याचिका ...