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इस मंदिर मे हुआ था शिव-पार्वती विवाह, आज भी जल रही है पवित्र अग्नि

भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माँ पार्वती को 107 बार जन्म लेना पड़ा था, जिसके बाद उनकी शादी शिव जी से हुई थी. आज हम आपको उस मंदिर के बारे में बताएँगे जहां पर शिव जी ने माँ पार्वती से शादी की थी.

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर मे हुआ था.यह मंदिर पवित्र और पौराणिक है. इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था.

इस मंदिर की खासियत हैं, की यहा सदियों से अग्नि जल रही है, कहते हैं इसी अग्नि को साक्षी मानकर शिव-पार्वती ने सात फेरे लिए थे. इस स्थान को शिव पार्वती का शुभ विवाह स्थल के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर का नाम त्रियुगी के पीछे भी महत्वपूर्ण कारण हैं. मंदिर मे प्रज्वलित अग्नि कई युगों-युगों से जल रही है, कहने का आशय है की मंदिर में अग्नि तीन युगों से जल रही है.

पुरानी कथाओ के अनुसार कहा जाता हैं, की शिव-पार्वती विवाह में विष्णु जी माँ पार्वती के भाई बन कर कई रीतियों का पालन भी किया था, जबकि ब्रह्मा जी ने विवाह में पुरोहित का काम किया था.

मंदिर मे तीन कुंड भी बने हुए हैं. विष्णु कुंड, ब्रह्मा कुंड और रुद्र कुंड जहां शिव-पार्वती विवाह से पहले देवी देवताओं ने स्नान किया था. कहा जाता है की इन तीनों कुंडो का निर्माण भगवान विष्णु की नासिका से हुआ था.

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