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इन जानलेवा बीमारियों का खतरा स्त्रियों में डिप्रेशन के बाद ज्यादा : शोध

डिप्रेशन व डायबीटीज-बीपी जैसी लंबी बीमारियों का सीधा कनेक्शन है. एक हालिया स्टडी में यह बात सामने आई है. इस स्टडी के मुताबिक जिन स्त्रियों में डिप्रेशन के लक्षण होते हैं उनमें ऐसी बीमारियां होने की आसार ज्यादा होती है. इस स्टडी में स्त्रियों की बीमारियों के पहले व बाद में डिप्रेशन के लक्षण पर स्टडी किया गया.

लीड रीसर्चर्स में से एक Xiaolin Xu ने कहा, ‘इन दिनों कई महिलाएं कई क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित हैं. डायबीटीज, कैंसर, दिल की बीमारी आजकल तेजी से बढ़ रही हैं. हमने इस बात पर स्टडी की कि डिप्रेशन के लक्षण के पहले व बाद में ये बीमारियां कैसे विकसित होती हैं.’

स्टडी में 43.2 फीसदी स्त्रियों ने बताया कि उनमें डिप्रेशन के लक्षण थे. लेकिन इनमें से सिर्फ आधी स्त्रियों को डिप्रेशन क्लिनिकली डायग्नॉज हुआ व उसका उपचार हुआ. डिप्रेशन का शिकार होने के पहले इन स्त्रियों में क्रोनिक बीमारियों का खतरा 1.8 गुणा ज्यादा देखा गया. डिप्रेशन के दौरान भी स्त्रियों में इन बीमारियों का सामान्य स्त्रियों की तुलना में 2.4 फीसदीज्यादा रिस्क देखा गया.

  • आज की भागती दौड़ती जिंदगी में हर आदमी को किसी न किसी की बात की चिंता हमेशा रहती है व यह चिंता ही डिप्रेशन का कारण बनता है. अपने देश की बात करें तो यहां हर 10 में से 5 आदमी डिप्रेशन का शिकार है. डिप्रेशन अपने आप में एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसकी वजह से इंसान के शरीर में कई व गंभीर बीमारियां जन्म ले लेती हैं.अगर आप भी किसी वस्तु के बारे में ज्यादा सोचते हैं, तो आप भी डिप्रेशन के साथ ही कई दूसरी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं
  • तुलसी हेल्थ केयर के मनोचिकित्सक डॉ। गौरव गुप्ता बताते हैं कि कैंसर के लगभग 60 फीसदी रोगी डिप्रेशन से ग्रस्त होते हैं, क्योंकि डिप्रेशन के कारण इम्यून सिस्टम निर्बल हो जाता है. किसी भी आदमी के डिप्रेशन में होने के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आनुवांशिक व बायोलॉजिकल कारण हो सकते हैं. डिप्रेशन से पीड़ित रोगी का इलाज आमतौर पर साइको थेरपी से किया जाता है.
  • एक अमेरिकन मैग्जीन में पब्लिश रिसर्च से पता चला है कि डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों में डिमेंशिया यानी मनोभ्रम होने का खतरा सामान्य से दो गुना ज्यादा होने कि सम्भावना है. डिमेंशिया से इंसान की मानसिक क्षमता, व्यक्तित्व व व्यवहार पर असर पड़ता है. जिन लोगों को डिमेंशिया होता है, उनकी याद्दाश्त भी निर्बल हो जाती है.
  • पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर (पीटीएसडी) एक तरह की मानसिक बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों को समय से पहले बुढ़ापा आने का खतरा होता है. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है. पीटीएसडी कई मानसिक विकारों जैसे गंभीर डिप्रेशन, गुस्सा, नींद न आना, खान-पान संबंधी रोगों व मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़ी बीमारी है. यह रिसर्च अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में हुई है.
  • डॉ गौरव गुप्ता का बोलना है कि एक स्टडी में पाया गया है कि बचपन के डिप्रेशन का अगर जल्द उपचार व रोकथाम कर लिया जाए, तो वयस्क होने पर दिल की बीमारी का खतरा कम होने कि सम्भावना है. डिप्रेशन से पीड़ित बच्चों में मोटापा, निष्क्रिय होने व धूम्रपान करने की आसार होती है, जो किशोरावस्था में ही दिल की बीमारियों के कारण बन सकते हैं.
  • डिप्रेशन की वजह से डायबीटीज भी होने कि सम्भावना है. हाल के कई शोधों में यह बात सामने आई है कि डिप्रेशन से कठिनाई बढ़ती है. विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर के पीछे चिंता व तनाव का ही हाथ होता है. यदि कोई आदमी डिप्रेशन से ग्रस्त है, तो उसे मधुमेह होने की आसार सामान्य आदमी के मुकाबले दोगुनी होती है.
  • हाल ही में हुए एक शोध में बहरेपन से संबंधित एक नयी जानकारी मिली है. इसकी माने तो डिप्रेशन में रहने वाले लोगों को बहरेपन का खतरा ज्यादा होता है. अमेरिका में हुए इस शोध में शोधकर्ताओं ने 18 वर्ष और इससे अधिक आयु के पुरुषों व स्त्रियों पर अध्ययन किया. इसका प्रभाव पुरुषों की तुलना में स्त्रियों पर अधिक देखा गया.
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