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आर्थिक मदद के लिए सरकारी संस्थाओं के चक्कर काट रहीं नाबालिग दुष्कर्म पीड़िताएं

भोपाल. दुष्कर्म जैसे अपराध की शिकार बन चुकी आधा दर्जन बच्चियां अब सिस्टम की बेपरवाही से जूझ रही हैं। पुलिस, कोर्ट-कचहरी, सामाजिक तानों की मार के बाद भी जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश में लगीं इन बेटियों के होसले आर्थिंक अभाव में टूटने लगे हैं। सिस्टम ने मुआवजे के नाम पर फाइलें तो तैयार कर ली लेकिन एफआईआर दर्ज होने के 10-11 माह बाद भी इन्हें मुआवजा राशि की पहली किस्त तक नहीं मिल पाई है। मप्र अपराध पीड़ित प्रतिकार योजना 2015 के अनुसार दुष्कर्म पीड़िताओं को सरकार तत्काल आर्थिक मदद उपलब्ध कराती है। योजना के तहत एफआईआर दर्ज कराने के बाद ही उसे मुआवजे की पहली किस्त मिल जाना चाहिए।  विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आशुतोष मिश्रा का कहना है कि चार माह पहले बजट आया था। बजट खत्म हो जाने के कारण अभी भी बहुत सारे मामले पेंडिंग चल रहे हैं।

10 माह से मुआवजे का इंतजार 
16 वर्षीय गीता (परिवर्तित नाम) के साथ उसके पिता के साथ ही काम करने वाले युवक ने दुष्कर्म किया था। 31 दिसम्बर को कोलार थाने में इसकी एफआईआर हुई। गीता ने 6 माह पहले  प्राधिकरण में मुआवजे के लिए आवेदन दिया था। इस घटना के बाद गीता के पिता का काम छूट गया । परिवार चलाने के लिए अब वह अपनी मां के साथ मजदूरी करती है।

14 माह बाद भी मदद नहीं
चूनाभट्‌टी में  रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी के साथ भी पड़ोसी ने दुष्कर्म किया था। अगस्त 2018 में कोलार थाने में इसकी एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने न तो जिला विधिक प्राधिकरण को इसकी जानकारी भेजी अौर न पीड़िता के परिजनों को कुछ बताया। मई में एक संस्था के प्रयासों से मंजू ने विधिक प्राधिकरण में आवेदन दिया लेकिन अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पाई है।

24 घंटे में देना होता है मुआवजा

अपराध पीड़ित प्रतिकार योजना 2015 के अनुसार सरकार हत्या, ज्यादती एवं दूसरे गंभीर अपराधों से पीड़ितों की आर्थिक मदद करती है। नियमानुसार मुआवजे की पहली किस्त एफआईआर दर्ज होने के तत्काल बाद प्रदान की जाती है। दूसरी किस्त मामले के कोर्ट में पहुंचे के बाद जबकि तीसरी किस्त कोर्ट का िनर्णय आने के बाद प्रदान की जाती है। गंभीर मामलो में यह मदद 24 घंटे के अंदर उपलब्ध कराई जाती है। मामले की गंभीरता के अनुसार यह राशि एक लाख से लेकर पांच लाख रुपए तक होती है।

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