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अब मोबाइल चोरी आसान नहीं, लगेगा झटका

स्टॉकहोल्म:  स्वीडन की कंपनी एरिक्सन ने नई टेक्नोलॉजी विकसित की, जिससे दिल की धड़कनों से भी पता लग जाएगा कि फोन किसका है। इसके अलावा चोर जैसे ही जेब से मोबाइल चुराने की कोशिश करेगा, वह इतनी तेजी से वाइब्रेट करेगा कि उसे पकडऩा आसान नहीं होगा। लो फ्रिक्शन मोड में आ जाने के कारण इसकी सतह चिकनी हो जाएगी और लगातार वाइब्रेट करने के कारण इस पर पकड़ मुश्किल हो जाएगी। हालांकि, अभी यह टेक्नोलॉजी बाजार में नहीं आई है।

एरिक्सन ने इस टेक्नोलॉजी को पेटेंट करवाने के लिए फरवरी में आवेदन किया है। कंपनी का कहना है कि पेटेंट मिलते ही हम इसका उत्पादन शुरू कर देंगे। इस टेक्नोलॉजी की खास बात यह है कि इसमें मोबाइल को चोरी से बचाने के लिए बायोमीट्रिक, फिंगरप्रिंट और पहचान के लिए ऑप्टिकल सेंसर लगाए गए हैं। यह सेंसर अलग-अलग मोड पर काम करेंगे। लो फ्रिक्शन मोड के जरिये दिल की धड़कनों से यह भी पता लगाया जा सकता है कि यह मोबाइल मालिक का है भी या नहीं। इसे कोई दूसरा तो उपयोग नहीं कर रहा है।

अमेरिका में 31 लाख से ज्यादा मोबाइल चोरी
अमेरिका और यूके सहित कई देशों में बड़े पैमाने पर हर साल मोबाइल चोरी होते हैं। 2016 के आंकड़ों की बात करें तो अमेरिका में 31 लाख और यूके में साढ़े चार लाख मोबाइल चोरी की घटना दर्ज हुई थी। चोरी के लिए सबसे मुफीद हेंडसेट आईफोन माना गया क्योंकि यह हल्की उंगलियों के सहारे आसानी से चुराए जाते थे। लेकिन सैमसंग के फोन भी बड़ी संख्या में चोरी हुए हैं।

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